धर्म-अध्यात्म

Shani Ki Dhaiya: क्या होती है शनिदेव की ढैय्या, जो धनी को बना देती है खाखपति

Sarita
10 Jan 2026 9:04 AM IST
Shani Ki Dhaiya: क्या होती है शनिदेव की ढैय्या, जो धनी को बना देती है खाखपति
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Shani Ki Dhaiya: हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है. वहीं ज्योतिष शास्त्र में शनि देव नौ ग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माने जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि शनि सबसे धीमी गति से गोचर करने वाले ग्रह हैं. उनका गोचर हर ढाई साल में एक बार होता है. शनि देव सबको उसके कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं. शनि की साढ़े साती और ढैय्या बारी-बारी से हर राशि के जातक पर लगती है.आमतौर पर लोग शनि देव की साढ़ेसाती के बारे में तो सबकुछ जानते हैं, लेकिन ढैय्या के बारे में उतना नहीं जानते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि शनि देव की ढैय्या क्या होती है?
ढैय्या क्या होती है एर ये कब लगती है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब शनि देव किसी कुंडली के आठवें भाव में विराजमान होते हैं, तो जातक पर उनकी ढैय्या का प्रभाव शुरू हो जाता है. ढैय्या ढाई साल रहती है. ये हर राशि के जातक पर बारी-बारी से लगती है. शनि देव की ढैय्या के दौरान जातक को मानसिक तनाव होता जाता है. उसको सेहत से संबंधित परेशानियां घेर लेती हैं. आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है|
ढैय्या का जीवन पर प्रभाव:
ढैय्या का अर्थ है शनि देव का जीवन पर बुरा प्रभाव. हालांकि, ढैय्या साढ़ेसाती से कम कष्टकारी मानी जाती है. शनि की ढैय्या के दौरान लोगों को कई तरह की दिक्कतें आती हैं. काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं. काम की गति धीमी हो जाती है. मेहनत के बाद भी काम सफल नहीं होते. हालांकि, शनि की ढैय्या सदा दुख देने वाली ही नहीं होती. जो अपने जीवन में अच्छे काम करता है, उसे उसका फल मिलता है. बुरे कर्म करने वालों को ढैय्या कष्ट देती है|
व्यक्ति को अपने कर्म सुधारने चाहिए. ताकि ढैय्या का नकारात्मक प्रभाव कम हो. गरीबों को परेशान नहीं करना चाहिए. उनकी सहायता करनी चाहिए. हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए. विशेषकर हर मंगलवार और शनिवार हनुमान चालीसा पाठ करना चाहिए. रोजाना सुबह ‘ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम, उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात.’ मंत्र का 11 बार जाप करना चाहिए. शनिवार के दिन शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए|
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