धर्म-अध्यात्म

Shani Jayanti 2025: शनि जयंती पर इन उपायों से करें शनिदेव को प्रसन्न, खत्म होंगे सारे दुख

Sarita
17 April 2025 12:37 PM IST
Shani Jayanti 2025: शनि जयंती पर इन उपायों से करें शनिदेव को प्रसन्न, खत्म होंगे सारे दुख
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Shani Jayanti 2025: हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को विशेष महत्व प्राप्त है। नवग्रहों में न्याय के प्रतीक माने जाने वाले शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को हुआ था, जिसे शनि जयंती के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। यह दिन न केवल शनि महाराज की कृपा प्राप्त करने का अवसर होता है, बल्कि शनि दोष जैसे साढ़ेसाती, ढैय्या, या शनि की प्रतिकूल दृष्टि से राहत पाने का उत्तम मुहूर्त भी होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि देव सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। वे कर्म के अनुसार फल देने वाले एकमात्र ऐसे ग्रह देवता हैं, जो न्यायप्रिय और तटस्थ भाव से कार्य करते हैं। इसलिए जो व्यक्ति अपने जीवन में सत्कर्म करता है, ईमानदारी से परिश्रम करता है और दूसरों की सहायता करता है, उस पर शनिदेव की विशेष कृपा बनी रहती है। वहीं, छल-कपट, अत्याचार और अधर्म करने वालों को शनि कठोर दंड भी देते हैं। शनि जयंती के इस अवसर पर कुछ विशेष उपाय करने से शनि देव प्रसन्न होंगे और सभी कष्टों से मुक्ति दिलाएंगे। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
तेल दान और छाया दान का महत्व
शनि जयंती के शुभ अवसर पर छाया दान का विशेष महत्व होता है। इसमें एक कांसे या लोहे की कटोरी में सरसों का तेल लिया जाता है और उसमें पहले स्वयं का प्रतिबिंब देखा जाता है। इसे छाया दान कहा जाता है और यह विधि शनि दोष निवारण का अचूक उपाय माना जाता है। इसके पश्चात यह तेल सहित किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दी जाती है या शनि मंदिर में अर्पित की जाती है। ऐसा करने से जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
शनि दोष निवारण हेतु विशेष दान
शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित जातकों को शनि जयंती के दिन कुछ विशिष्ट वस्तुओं का दान अवश्य करना चाहिए। इनमें काले वस्त्र, सरसों का तेल, काले तिल, काले चने, उड़द की दाल, लोहा, और भोजन का दान प्रमुख हैं। यह दान शनि ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का कार्य करते हैं और साथ ही कुंडली में शनि की स्थिति को संतुलित करने में सहायक होते हैं। यह भी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन गरीबों की सेवा करता है, उसे शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
शनि मंत्रों का जाप और व्रत का महत्व
शनि जयंती से प्रारंभ कर प्रत्येक शनिवार को ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। यह मंत्र शनि देव को प्रसन्न करने के लिए अत्यंत प्रभावी माना गया है। साथ ही शनि चालीसा, शनिदेव की आरती और शनि स्तोत्र का पाठ करने से भी अद्भुत फल प्राप्त होता है। यदि संभव हो तो इस दिन व्रत रखकर शनिदेव की आराधना करें। यह व्रत मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं से छुटकारा दिलाने में सहायक सिद्ध होता है।
शिव और हनुमान जी की आराधना
शनि देव के आराध्य भगवान शिव माने जाते हैं। अतः शनि जयंती के दिन शिवलिंग पर काले तिल मिश्रित जल से जलाभिषेक करें और महामृत्युंजय मंत्र या ॐ नम: शिवाय का जाप करें। शनि के दोषों को शांत करने के लिए यह अत्यंत प्रभावी उपाय माना गया है। साथ ही शनि देव हनुमान जी के परम भक्त हैं और उनके पूजन से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। अतः शनि पूजा के साथ-साथ हनुमान जी की पूजा, सुंदरकाण्ड का पाठ या हनुमान चालीसा का पाठ करें। यह शनि के दंड से रक्षा प्रदान करता है।
ज्योतिषशास्त्र में पीपल और शमी वृक्ष का संबंध प्रत्यक्ष रूप से शनि ग्रह से बताया गया है। शनि जयंती के दिन अथवा प्रत्येक शनिवार को पीपल या शमी के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करना, तिल के तेल का दीपक जलाना और उसकी सात परिक्रमा करना अति शुभ फलदायक होता है। यह उपाय शनि के कुप्रभाव को शांत करता है और जीवन की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है।
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