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धर्म-अध्यात्म
Shani Dev: शनि की साढ़ेसाती और दोषों से बचने के लिए करें ये पांच आसान उपाय
Sarita
3 July 2025 4:40 PM IST

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Shani Dev :ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि न्याय करते हुए वे साधक को शुभ-अशुभ फल प्रदान करते हैं। उन्हें कर्म, न्याय और अनुशासन का कारक ग्रह भी माना जाता है। इसलिए कुंडली में शनि का स्थान विशेष महत्व रखता है। इसका सीधा असर व्यक्ति के निजी जीवन पर पड़ता है।
अगर कुंडली में शनि की स्थिति कमजोर है तो व्यक्ति को कर्ज, तनाव और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा शिक्षा, करियर, व्यापार और धन कमाने में लगातार संघर्ष करना पड़ता है। इस दौरान शनि की साढ़ेसाती होने पर समय और भी कष्टकारी माना जाता है।
आपको बता दें, शनि की साढ़ेसाती होने पर व्यक्ति को आर्थिक, पारिवारिक, मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके कारण काम पूरे होने में दिक्कत, असफल यात्राएं और व्यापार में धन हानि जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लेकिन कुछ खास उपायों की मदद से आप शनि की साढ़ेसाती और दोषों के प्रभाव को कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में।
शनि महाराज की पूजा:
शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव से बचने के लिए आप हर शनिवार को शनि महाराज की पूजा करें। इस दौरान जल में काले तिल मिलाकर पीपल के वृक्ष में अर्घ्य दें। इसके बाद शनि चालीसा का पाठ करें। अंत में पेड़ की परिक्रमा करते हुए शनि मंत्रों का उच्चारण करें। इससे शनि महाराज प्रसन्न होते हैं और काम में आ रही बाधाओं को दूर करते हैं।
तामसिक भोजन का सेवन न करें:
शनिवार के दिन गलती से भी तामसिक भोजन का सेवन न करें। इसके अलावा महिला का अपमान, किसी से लड़ाई व कटु वचन बोलने से बचें। इसके प्रभाव से शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है।
ज्योतिषियों के मुताबिक शनिवार को एक रात पहले भीगे चने की दाल और हल्दी, लोहे का टुकड़ा व जला हुआ कोयला एक काले रंग के वस्त्र में बांध लें। इसके बाद इसको आप शनि मंत्र का स्मरण करते हुए उस जल में प्रवाहित करें। इससे तनाव, कर्ज, रोग और क्लेशों से मुक्ति मिलती हैं।
काली गाय की पूजा :
शनिवार शनिदेव की पूजा के लिए सबसे शुभ दिन है। इसलिए इस दिन काली गाय की विधि-विधान से पूजा करें। गाय के माथे पर तिलक लगाएं। फिर लड्डू खिलाकर गाय की परिक्रमा करें। इससे साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है।
शनिदेव आरती:
शनिवार के दिन शनि मंदिर में जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इस दौरान शनि देव की आरती करें। आप चाहें तो आरती यहां से पढ़ सकते हैं। मान्यता है कि आरती से शनिदेव सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
शनि देव की आरती:
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव....
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनि देव....
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनि देव....
जय जय श्री शनि देव....
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।
जय जय श्री शनि देव..
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