धर्म-अध्यात्म

Shani Amavasya 2025: शनि अमावस्या पर कब करें स्नान और दान, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Sarita
22 Aug 2025 8:11 AM IST
Shani Amavasya 2025: शनि अमावस्या पर कब करें स्नान और दान, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
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Shani Amavasya 2025: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। हर माह पड़ने वाली अमावस्या तिथि को पितृ तर्पण, स्नान-दान और पूजा-पाठ के लिए शुभ माना जाता है। इनमें से जब अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है, तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं। इस दिन स्नान, दान और शनिदेव की पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि अमावस्या को पितरों को प्रसन्न करने और शनि दोष से मुक्ति पाने का सबसे अच्छा अवसर माना जाता है। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
भाद्रपद शनि अमावस्या कब है:
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शनि अमावस्या की तिथि शुक्रवार, 22 अगस्त को सुबह 11:55 बजे शुरू होगी और तिथि का समापन शनिवार, 23 अगस्त को सुबह 11:35 बजे होगा। उदय तिथि के अनुसार, भाद्रपद अमावस्या 23 अगस्त को मनाई जाएगी।
इस शुभ मुहूर्त में करें स्नान-दान:
अमावस्या तिथि पर स्नान और दान करने का सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय से पहले का होता है, इसलिए इस दिन स्नान और दान का शुभ मुहूर्त सुबह 4:34 बजे से शुरू होकर 5:22 बजे तक रहेगा।
शनि अमावस्या पर स्नान और दान का महत्व:
पवित्र नदियों में स्नान: इस दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर ही स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
दान का महत्व: शनि देव को प्रसन्न करने और शनि की महादशा, साढ़ेसाती या ढैय्या के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए इस दिन दान करना बहुत लाभकारी माना जाता है।
शनि अमावस्या पर दान की जाने वाली वस्तुएँ:
काले तिल, काला कंबल या काले कपड़े, सरसों का तेल, लोहे की वस्तुएँ, उड़द की दाल, जूते-चप्पल किसी गरीब या ज़रूरतमंद व्यक्ति को दान करने चाहिए।
शनि अमावस्या पर पूजा विधि:
शनि अमावस्या के दिन शनिदेव की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ़ वस्त्र धारण करें। शनिदेव की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर पूजा करें। शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। शनि चालीसा और शनि स्तोत्र का पाठ करें। इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ और उसकी 7 या 11 परिक्रमा करें।
अमावस्या पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
इस दिन मांस-मदिरा का सेवन न करें।
झूठ बोलने या किसी को परेशान करने से बचें।
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए गरीब और असहाय लोगों की मदद करें।
इस दिन कोई भी नया काम शुरू न करें, खासकर अगर आपकी कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ हो।
इस दिन शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैया से पीड़ित लोगों को राहत मिलती है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन कालसर्प दोष और ग्रह बाधा भी दूर होती है। दान-पुण्य करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।
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