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धर्म-अध्यात्म
Shami Tree Worship: जाने विजयादशमी पर शमी वृक्ष का विशेष महत्व
Sarita
28 Sept 2025 8:04 AM IST

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Shami Tree Worship: हिंदू परंपरा में पेड़ों के पूजन का भी बहुत महत्व है. नवरात्रि में शमी वृक्ष का पूजन करने के पीछे भी कई कारण है. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसके पीछे पौराणिक कथाएं और मान्यताएं भी जुड़ी है. इसे शनि ग्रह से भी जोड़ कर देखा जाता है. इसे समृद्धि,शांति का भी प्रतीक माना जाता है. हिंदू परंपरा में दरवाजे पर शमी का पेड़ लगाने से परिवार में शांति और विपदा से मुक्ति मिलती है|
विजयादशमी को होती है शमी की पूजा: शारदीय नवरात्र के नौ दिनों बाद विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है. असत्य पर सत्य का विजय का प्रतीक विजयादशमी के दिन रावण दहन भी किया जाता है. इसी दिन शस्त्र पूजन के साथ शमी के पेड़ की भी पूजा करने की प्रथा है|
शमी में शनि का वास होता है. ग्रह-नक्षत्रों में भी शनि को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं. कहा जाता है कि जब शनि आपके प्रतिकूल हो तो शमी के वृक्ष के पूजन से आपके संघर्ष में अनुकूलता आती है. शनि हमेशा कर्म के अनुसार फल देते हैं. इसलिए शमी के वृक्ष का प्रतिदिन पूजन से संकटों से बचा जा सकता है. इसके पूजन से शनि ग्रह से संबंधित सभी दोष समाप्त हो जाते हैं|
श्रीराम ने की थी शमी के वृक्ष की पूजा: स्कंद पुराण और महाभारत में वर्णन मिलता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण के पहले शमी वृक्ष की पूजा की थी. उन्होंने वृक्ष के सामने प्रार्थना कर विजयी होने का वरदान मांगा था. फिर लंका पर विजय पाने के बाद उन्होंने अयोध्या में लोगों को स्वर्ण दान दिया था. जिसके प्रतीक के रूप में उन्होंने शमी के पेड़ की पत्तियों का दान किया था|
महाभारत काल में भी पांडवों से रहा है गहरा संबंध: महाभारत काल में जब पांडवों को वनवास मिला था तो मान्यता है कि उन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के पेड़ में ही छीपा दिए थे. वनवास पूरा होने के बाद उन्होंने पुन: वहां से अपना अस्त्र-शस्त्र वापस लिये और कुरूक्षेत्र में युद्ध के लिए गए. पांडवों ने भी शमी के वृक्ष का पूजन कर युद्ध में विजयी होने का वरदान मांगा था|
इस कारण भी शमी के वृक्ष को विजय का प्रतीक माना जाता है. इस प्रकार शमी का पेड़ भारतीय संस्कृति में सिर्फ एक पौधा ही नहीं है बल्कि शौर्य, शांति और पौराणिक कथाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है|
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