धर्म-अध्यात्म

Sawan Purnima Katha: सावन पूर्णिमा पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, पूरी होगी हर मनोकामना

Sarita
9 Aug 2025 8:30 AM IST
Sawan Purnima Katha: सावन पूर्णिमा पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, पूरी होगी हर मनोकामना
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Sawan Purnima Katha: एक साल में कुल 12 पूर्णमासी तिथियां पड़ती हैं. सावन के महीने में आने वाली पूर्णिमा को श्रावण पूर्णिमा कहते हैं, जिसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. आज यानी 9 अगस्त को सावन की पूर्णिमा है. साथ ही, इस दिन रक्षाबंधन भी है. हर साल सावन पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है, इसलिए हिंदू धर्म में यह पूर्णिमा तिथि बहुत विशेष मानी गई है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है|
वहीं, इस दिन स्नान और दान का भी खास महत्व होता है. स्नान-दान के अलावा इस दिन व्रत रखकर कथा भी पढ़ी जाती है. कहते हैं कि इस कथा के बिना पूर्णिमा का व्रत अधूरा माना जाता है. ऐसे में चलिए पढ़ते हैं सावन पूर्णिमा की व्रत कथा|
सावन पूर्णिमा की व्रत कथा:
श्रावण पूर्णिमा की कथा तुंगध्वज नामक राजा से जुड़ी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुंगध्वज एक नगर का राजा था जो शिकार करना पसंद करता था. एक बार पूर्णिमा के दिन राजा शिकार करने निकला और शिकार करते समय राजा थक गया. फिर वह एक बरगद वृक्ष के नीचे विश्राम करने लगा. राजा ने वहां बहुत से लोगों को सत्यनारायण की पूजा करते देखा. लेकिन राजा अपने अहंकार के कारण न तो उस पूजा में भाग लिया और न ही भगवान को सम्मान दिया|
यहां तक कि राजा बिना प्रसाद लिए ही अपने नगर चला गया. जब वह अपने राज्य में पहुंचा, वह घबरा गया, क्योंकि दूसरे राज्य के राजा ने उसके राज्य पर हमला कर दिया था. राजा ने अपनी गलती को समझा और जंगल की ओर भागा. तुंगध्वज वापस उसी स्थान पर गया जहां लोग सत्यनारायण को पूजा कर रहे थे. राजा ने वहां पहुंचकर अपनी गलती के लिए माफी मांगी|
भगवान सत्यनारायण ने देखा कि वह बहुत दुखी था, तो उन्होंने उसे माफ कर दिया. राजा वापस अपने राज्य में आने पर हालात पहले की तरह ही थे, यानी सब कुछ सही था. राजा तुंगध्वज ने फिर हर पूर्णिमा को भगवान सत्यनारायण की आराधना की, जिससे राजा ने लंबे समय तक राज्य किया|
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