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धर्म-अध्यात्म
Sawan 2025:शिवलिंग पर ये पांच चीजें चढ़ाने से क्या होता है लाभ
Sarita
3 July 2025 12:15 PM IST

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Sawan 2025: आषाढ़ पूर्णिमा के समाप्त होते ही श्रावण की शुरुआत होती हैं। यह देवों के देव महादेव के प्रिय माह में से एक है, जिसका इंतजार शिव भक्तों को साल भर रहता है। हिंदू धर्म में इसे महाकाल को प्रसन्न और उनकी कृपा पाने का सबसे बड़ा अवसर माना गया है। मान्यता है कि सावन में की गई पूजा-अर्चना का फल साधक को अवश्य मिलता है। यही नहीं लंबे समय से चली आ रही दिकक्तें भी दूर होती हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन वही महीना है जब देवी पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न महादेव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इस बार 11 जुलाई 2025 से सावन आरंभ हो रहा है। इस माह कुल 4 सोमवार पड़ेंगे। इन सभी में शिवलिंग की उपासना करने पर कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। इसके अलावा इन पांच खास चीजों को अर्पित करने से कार्यों में मनचाहे परिणाम मिलते हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
कब से शुरू हो रहा है सावन:
इस साल 11 जुलाई से सावन माह की शुरुआत हो रही है और इसका समापन 9 अगस्त 2025 के दिन होगा। इस दौरान सावन के पहले दिन पूर्वाषाढा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग रहेगा।
सावन के सोमवार व्रत की तिथियां :
14 जुलाई – पहला सोमवार व्रत
21 जुलाई – दूसरा सोमवार व्रत
28 जुलाई – तीसरा सोमवार व्रत
04 अगस्त – चौथा और अंतिम सोमवार व्रत
इसके बाद 09 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ यह पावन महीना समाप्त होगा।
शिवलिंग पर अर्पित करें ये खास चीजें:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर गाय के दूध से बना शुद्ध देसी घी चढ़ाने से महादेव प्रसन्न होते हैं। साथ ही मन से डर भय भी दूर होते हैं।
शिवलिंग पर शमी के फूल अर्पित करना बेहद शुभ होता है। इससे साधक को रोग से मुक्ति और सांसारिक सुख की प्राप्ति होती हैं।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। आप ध्यान रखें की जल हमेशा धीरे चढ़ाएं।
सावन महादेव का प्रिय माह है। इस महीने में दूध में चीनी मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाने से मानसिक शांति मिलती है।
शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से आर्थिक स्थिति में सुधार और भाग्योदय होता है।
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
शिव जी का मूल मंत्र
ऊँ नम: शिवाय।।
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