धर्म-अध्यात्म

Sawan 2025 : सोमवार को भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाते समय न भूलें ये बातें

Sarita
3 July 2025 1:05 PM IST
Sawan 2025 : सोमवार को भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाते समय न भूलें ये बातें
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Sawan 2025 : भगवान शिव की पूजा के लिए सावन का महीना सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस महीने भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, राख, धतूरा, आक और खास तौर पर बेलपत्र (बिल्वपत्र) चढ़ाते हैं। मान्यता है कि बेलपत्र भगवान शिव को बेहद प्रिय है, लेकिन अगर इसे चढ़ाते समय सही नियमों का पालन न किया जाए तो पूजा का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। आइए जानते हैं बेलपत्र चढ़ाते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है|
बेलपत्र की शुद्धता जरूरी:
हमेशा स्वच्छ, हरे और ताजे बेलपत्र ही चढ़ाएं. मुरझाए, सूखे या कीट लगे पत्ते शिव पूजन में वर्जित माने जाते हैं|
त्रिपत्र बेलपत्र ही अर्पित करें:
ऐसे बेलपत्र चुनें जिनमें तीन पत्तियां जुड़ी हों. यह त्रिदेवों और त्रिगुणों का प्रतीक माना जाता है और शिव पूजा में अत्यंत फलदायी होता है|
बेलपत्र पर किसी प्रकार का छेद, चीरा या फटाव नहीं होना चाहिए| अपूर्ण बेलपत्र पूजा में निषिद्ध होते हैं|
डंडी (डंठल) हटाकर ही अर्पण करें:
बेलपत्र की डंडी निकालकर ही शिवलिंग पर चढ़ाएं. मान्यता है कि डंडी सहित बेलपत्र चढ़ाना शिवजी को अप्रिय होता है|
बेलपत्र चोरी से न लाएं:
बेलपत्र हमेशा श्रद्धा से स्वयं तोड़ें. तोड़ते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और पेड़ से क्षमा याचना करें|
पूर्व में चढ़ाया गया बेलपत्र फिर उपयोग न करें:
जो बेलपत्र पहले ही चढ़ चुका हो, उसे दोबारा उपयोग में लेना अनुचित होता है. हर बार नया और शुद्ध बेलपत्र ही अर्पित करें|
सावन के सोमवार का विशेष महत्त्व:
सावन के सोमवार को बेलपत्र चढ़ाने का विशेष पुण्य माना गया है. इस दिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप अवश्य करें|
सावन कब से हो रहा है शुरू:
सावन मास की शुरुआत हर वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा के बाद होती है और इसका समापन भाद्रपद अमावस्या के दिन होता है. वर्ष 2025 में सावन मास 10 जुलाई (गुरुवार) से आरंभ होकर 8 अगस्त (शुक्रवार) को समाप्त होगा. इस एक महीने की अवधि को भगवान शिव की भक्ति और व्रत-उपवास के लिए अत्यंत पावन माना जाता है|
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