धर्म-अध्यात्म

Sawan 2025:भगवान शिव को जल चढ़ाने के 3 गुप्त नियम

Sarita
1 Aug 2025 6:42 AM IST
Sawan 2025:भगवान शिव को जल चढ़ाने के 3 गुप्त नियम
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Sawan 2025:श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा करना बेहद पुण्यदायी माना जाता. शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कुछ ऐसे गुप्त नियम हैं जिनका पालन करने पर भक्त को विशेष फल मिलता है और उसका भाग्य भी बदल सकता है. ये नियम हर किसी को ज्ञात नहीं होते और इन्हें पुराणों व तंत्र शास्त्रों में गुप्त रूप से बताया गया है.श्रावण मास में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि सावन में भगवान शिव को जल चढ़ाने से न केवल मनोकामनाएं पूरी होती हैं, बल्कि जीवन की परेशानियां भी दूर होती हैं|
लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिव को जल चढ़ाने के कुछ गुप्त नियम भी होते हैं? इन नियमों को शास्त्रों और पुराणों में विशेष रूप से बताया गया है. जो भक्त इन नियमों का पालन करते हैं, उनके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है. शिवभक्ति में नियमों की गहराई जितनी समझ में आए, उसका फल उतना ही गहन होता है. जो भक्त इन गुप्त नियमों के अनुसार भोलेनाथ को जल चढ़ाते हैं, उनकी मनोकामनाएं जल्दी पूर्ण होती हैं और भाग्य तेजी से प्रबल होता है. आइए जानते हैं ऐसे ही तीन रहस्यमयी लेकिन फलदायी नियम|
जल चढ़ाते समय शिवलिंग के पीठभाग को जल न लगे:
शिवपुराण के अनुसार, शिवलिंग का पीठभाग (जिसे ब्रह्मभाग भी कहते हैं) अत्यंत पवित्र होता है और इस पर जल या स्पर्श करना वर्जित माना गया है. भक्त को जल अर्पण करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि जल केवल शिवलिंग के अग्रभाग (मुखभाग) से होकर जलाधारी में गिरे, न कि पीछे. इससे पूजा सफल और दोषरहित मानी जाती|
सोमवार को सूर्योदय से पहले या ब्रह्म मुहूर्त में ही करें जलाभिषेक:
कम ही लोग जानते हैं कि श्रावण सोमवार को यदि ब्रह्म मुहूर्त यानी सूर्योदय से पहले जल अर्पण किया जाए, तो इसका फल सामान्य से 100 गुना अधिक होता है. यह समय ध्यान, जप और तंत्र क्रियाओं के लिए विशेष रूप से शक्तिशाली माना जाता है. यदि संभव हो तो इसी मुहूर्त में शिवलिंग पर जल चढ़ाएं|
जल चढ़ाते समय मन ही मन ‘कामना’ बोलें:
तंत्र और मनोविज्ञान दोनों मानते हैं कि जब कोई कामना (desire) को केवल ईश्वर से कहकर गुप्त रखा जाता है, तो उसका पूरा होने का योग बहुत बढ़ जाता है. शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय अपनी मनोकामना को मन ही मन शिवजी को समर्पित करें, लेकिन उसे किसी से साझा न करें. यह एक अद्भुत ‘गुप्त तांत्रिक सिद्धांत’ है|
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