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धर्म-अध्यात्म
Sarva Pitru Amavasya 2025: सर्वपितृ अमावस्या पर करें इन पवित्र वृक्षों की पूजा,मिलेगा पितरों का आशीर्वाद
Sarita
19 Sept 2025 9:25 AM IST

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Sarva Pitru Amavasya 2025: सर्व पितृ अमावस्या का दिन पितरों को तृप्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दिन श्राद्ध, तर्पण और दान के साथ-साथ शास्त्रों में विशेष वृक्षों की पूजा का भी महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इन वृक्षों में देवताओं और पितरों का वास होता है और अगर भक्तिभाव से इनकी पूजा की जाए तो पितृ प्रसन्न होकर परिवार पर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। सर्व पितृ अमावस्या पर न केवल श्राद्ध और तर्पण का महत्व है, बल्कि इन पवित्र वृक्षों की पूजा का भी विशेष महत्व है। पीपल, बरगद, आंवला, बेल और तुलसी की भक्तिपूर्वक पूजा करके आप अपने पितरों की आत्मा को तृप्त कर सकते हैं और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति प्राप्त कर सकते हैं।
पीपल वृक्ष:
पीपल को त्रिदेवों का निवास माना जाता है। विष्णु पुराण में इसे सबसे पवित्र वृक्ष बताया गया है। सर्व पितृ अमावस्या पर पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने, जल चढ़ाने और मंत्र जाप करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इससे घर से कलह और दरिद्रता भी दूर होती है।
बरगद का वृक्ष:
बरगद के वृक्ष को दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि बरगद के वृक्ष की पूजा करने से पितरों को दीर्घकालिक संतुष्टि मिलती है। इस दिन बरगद के तने पर जल चढ़ाने, दीपक जलाने और पितरों का स्मरण करने से परिवार और संतान को दीर्घायु और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
आँवला वृक्ष:
आँवले को अमृत फल कहा जाता है। पद्म पुराण में इसका विशेष महत्व वर्णित है। सर्व पितृ अमावस्या पर आँवले के वृक्ष की पूजा और आँवला दान करने से पितरों को दीर्घकालिक शांति मिलती है और घर में स्वास्थ्य और धन की वृद्धि होती है।
बेल वृक्ष:
बेल के पत्ते भगवान शिव को बहुत प्रिय हैं। शास्त्रों के अनुसार, बेल वृक्ष की पूजा करने से न केवल पितरों को बल्कि स्वयं भगवान शिव को भी प्रसन्नता होती है। सर्व पितृ अमावस्या पर बेल के पेड़ के नीचे बेल के पत्ते चढ़ाना और तर्पण करना विशेष फलदायी होता है।
तुलसी के बिना कोई भी पूजा पूरी नहीं मानी जाती। तुलसी पुराण में कहा गया है कि तुलसी में स्वयं देवी लक्ष्मी का वास होता है। पितृ अमावस्या पर तुलसी के पौधे पर दीपक जलाने और जल चढ़ाने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और परिवार पर देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
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