- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- Sankashti Chaturthi...
धर्म-अध्यात्म
Sankashti Chaturthi vrat katha 2025:इस व्रत कथा को पढ़ने से जीवन की सभी बाधाओं का अंत करेंगे बप्पा
Sarita
10 Sept 2025 11:30 AM IST

x
Sankashti Chaturthi vrat katha 2025 : हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा करना अनिवार्य माना जाता है। हर माह की चतुर्थी तिथि को गणेशजी की पूजा की जाती है। विशेषकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखना और व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत पुण्यदायी होता है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति के जीवन की सभी बाधाएँ और कठिनाइयाँ दूर हो जाती हैं।
विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा:
पुराणों के अनुसार, बाणासुर की पुत्री उषा ने एक रात स्वप्न में अनिरुद्ध को देखा। अनिरुद्ध से दूर होने का दुःख उसे इतना सताने लगा कि उसका मन शांति के लिए बेचैन हो गया। उसने अपनी सखी चित्रलेखा से त्रिभुवन में रहने वाले सभी व्यक्तियों के चित्र लाने का अनुरोध किया। जब चित्रलेखा ने अनिरुद्ध को पहचान लिया, तो उषा ने उसे आदेश दिया कि वह उसे तुरंत ढूंढे, अन्यथा वह अपने प्राण त्याग देगी।
राक्षसी माया में निपुण चित्रलेखा द्वारकापुरी पहुँची और रात्रि में अनिरुद्ध का अपहरण करके उसे बाणासुर की नगरी ले आई। इस घटना से अनिरुद्ध के पिता प्रद्युम्न गहरे शोक में डूब गए और उन्हें असाध्य रोग हो गया। रुक्मिणी जी भी दुःखी होकर कृष्ण जी से प्रार्थना करने लगीं।
श्री कृष्ण जी ने इस स्थिति का समाधान जानने के लिए लोमश ऋषि से मार्गदर्शन लिया। ऋषि ने बताया कि अनिरुद्ध का अपहरण उषा की सखी चित्रलेखा ने कर लिया है और वह बाणासुर के महल में सुरक्षित है। लोमश ऋषि ने श्री कृष्ण जी को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत करने की सलाह दी।
श्री कृष्ण जी ने व्रत किया और इसके प्रभाव से बाणासुर को पराजित किया। बाणासुर की हजार भुजाओं को काटने में व्रत की महिमा का विशेष योगदान माना जाता है। कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का यह व्रत सभी कष्टों और कठिनाइयों का नाश करता है। अतः इस चतुर्थी पर विधिपूर्वक गणेश पूजन और व्रत कथा का पाठ करने से जीवन में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं और सुख-शांति का आगमन होता है।
व्रत कैसे करें:
दिन चुनें: कृष्ण पक्ष की चतुर्थी।
स्नान: शुद्ध जल से स्नान करें।
पूजा सामग्री: गणेश प्रतिमा, दूर्वा, मोदक, दीपक और अक्षत।
कथा पाठ: संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें।
प्रसाद: व्रत के बाद मोदक या फल का प्रसाद ग्रहण करें।
संकल्प: बाधाओं के निवारण और जीवन की समृद्धि के लिए भगवान गणेश से आशीर्वाद लें।
प्रत्येक संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन से व्रत का फल बढ़ जाता है। व्रती को कथा सुनते समय मन को शांत रखना चाहिए और पूरी श्रद्धा से भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए।
Next Story





