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Sankashti Chaturthi 2025: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की पूजा के दौरान जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, खुल जाएंगे तरक्की के रास्ते

Sarita
17 March 2025 8:06 AM IST
Sankashti Chaturthi 2025: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की पूजा के दौरान जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, खुल जाएंगे तरक्की के रास्ते
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Sankashti Chaturthi 2025: हिंंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का व्रत बहुत महत्व रखता है. ये व्रत भगवान गणेश को समर्पित किया गया है. हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. चैत्र माह में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा और व्रत किया जाता है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-शांति रहती है. इस दिन पूजा के समय व्रत कथा का पाठ भी अवश्य कराना चाहिए. इस दिन व्रत कथा पाठ करने से सभी रुके हुए काम पूरे हो जाते हैं, साथ ही तरक्की के रास्ते खुलते हैं.
आज है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत आज यानी 17 मार्च को रात 7 बजकर 33 मिनट पर हो रही है. वहीं इस चतुर्थी तिथि का समापन कल 18 मार्च रात 10 बजकर 9 मिनट पर हो जाएगा. संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय के समय पूजा की जाती है. ऐसे में आज ही भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा|
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा:
प्राचीन काल में मकरध्वज नाम के एक राजा थे. वो प्रजा प्रेमी थे. उनके राज्य में कोई गरीब नहीं था. प्रजा को चोर डाकुओं का कोई भय नहीं था. सभी लोग बुद्धिमान, दानी और धार्मिक थे. राजा को कोई संतान नहीं थी. तत्पश्चात कालांतर में महर्षि याज्ञवल्क्य की कृपा से राजा को एक पुत्र की प्राप्ति हुई. इसके बाद राजा ने अपने राज्य का भार अपने मंत्री धर्मपाल को सौंप दिया और अपने राजकुमार का पालन पोषण करने लगे. राज्य का शासन हाथ में आने के कारण मंत्री धर्मपाल धन धान्य से समृद्ध हो गए. मंत्री को पांच पुत्र हुए. मंत्री ने अपने सभी पुत्रों का विवाह बड़ी धूमधाम से किया और राज्य के धन का उपभोग करने लगे|
मंत्री के सबसे छोटे बेटे की पत्नी बहुत धर्मपरायणी थी. उसने चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का व्रत और पूजन किया. ये देखकर उसकी सास ने कहा कि क्या तंत्र मंत्र करके मेरे पुत्र को वश में करने का उपाय कर रही है. मुझे ये सब तांत्रिक अभिचार पसंद नहीं है. इसके जवाब में बहु ने कहा कि सासू मां मै संकट नाशक भगवान गणेश का व्रत कर रही हूं. यह व्रत अत्यंत फलदाई है. इस पर उसने अपने पुत्र से कहा कि तुम्हारी पत्नी जादू टोने पर उतारू हो गई है. मेरे कई बार मन करने पर भी मेरी बात नहीं मान रही है. तुम इसे पीटकर ठीक कर दो. मैं गणेश को नहीं जानती. ये कौन हैं और इनका व्रत कैसे होता है. हमलोग राजकुल के हैं. फिर ये हमारी किस विपदा को नष्ट करेंगे|
मां की बात मान कर बेटे ने अपनी पत्नी को खूब मारा-पीटा. इतनी पीड़ा सहकर भी उसने व्रत किया और भगवान गणेश से प्रार्थना की. उसने कहा कि हे जगतपति आप मेरे सास-ससुर को किसी प्रकार का कष्ट दीजिए, जिससे उनके मन में आपके प्रति भक्ति भाव जागे. इसके बाद भगवान गणेश ने सबके देखते ही देखते राजकुमार का अपहरण करके मंत्री धर्मपाल के महल में छिपाकर रख दिया. बाद में उसके वस्त्र, आभूषण उतारकर महल में फेंक दिए और स्वयं अंतर्ध्यान हो गए. इधर राजा ने अपने पुत्र को पुकारा, लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं मिला|
फिर राजा ने मंत्री के महल में जाकर पूछा कि मेरा राजकुमार कहां चला गया. राजा की बात सुनकर मंत्री ने उत्तर दिया. हे राजन आपका आपका पुत्र कहां चला गया इस बारे में मुझे कुछ पता नहीं है. मैं अभी गांव, नगर, बाग, बगीचों आदि सभी स्थानों पर उसकी खोज कराता हूं. जब काफी समय बाद राजकुमार नहीं मिला तो राजा ने मंत्री धर्मपाल को कहा कि बता दो राजकुमार कहां है नहीं तो मैं तुम्हारा वध कर डालूंगा. महल में उसके वस्त्र और आभूषण दिख रहे हैं, लेकिन बस वही नहीं मिल रहा है. इसपर मंत्री ने सिर झुककर कहा कि राजन मैं पता लगवाता हूं|
इसके बाद धर्मपाल ने महल में आकर राजकुमार के बारे में अपनी पत्नी, पुत्रों और बहुओं से पूछा. ससुर की बात सुनकर छोटी बहू बोली कि आप पर गणेश जी का कोप हुआ है. इसलिए आप गणेश जी का संकट नाशक चतुर्थी व्रत कीजिए. बहु ने पूजा और व्रत की विधि भी बताई. इसके बाद सब लोगों ने गणेश चतुर्थी का व्रत शुरू किया. इससे गणेश जी प्रसन्न हुए और राजकुमार को प्रकट कर दिया|
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