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धर्म-अध्यात्म
Sakat Chauth Vrat 2026: सकट चौथ व्रत का इस विधि से करें पारण
Sarita
6 Jan 2026 12:22 PM IST

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Sakat Chauth Vrat 2026: सनातन परंपरा में सकट चौथ का व्रत अत्यंत संयम, श्रद्धा और नियमों से जुड़ा माना गया है. यह व्रत माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है और वर्ष 2026 में सकट चौथ 6 जनवरी यानी आज सोमवार को मनाई जा रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसे संकट निवारण, संतान सुख तथा पारिवारिक शांति के लिए विशेष फलदायी माना गया है. शास्त्रों में बताया गया है कि व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब श्रद्धालु व्रत के नियमों, आहार-विहार और पारण विधि का सही पालन करते हैं|
सकट चौथ का व्रत कठोर संयम और आत्मनियंत्रण का प्रतीक माना गया है. इस दिन प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और गणेशजी की पूजा के साथ व्रत का संकल्प लिया जाता है. कई श्रद्धालु निर्जल व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार के साथ व्रत करते हैं. शास्त्रों में उल्लेख है कि व्रत के दौरान मन, वाणी और कर्म की शुद्धता अत्यंत आवश्यक होती है. अनावश्यक क्रोध, नकारात्मक विचार और विवाद से दूर रहकर पूरे दिन साधना और संयम का पालन करना व्रत की आत्मा माना गया है|
पारण का सही समय और विधि:
सकट चौथ का पारण सामान्य व्रतों से भिन्न माना जाता है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस व्रत का पारण चंद्र दर्शन के बाद किया जाता है. आज चंद्रमा 8 बजकर 54 मिनट पर निकलेगा. इसी समय अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा. मान्यता है कि सकट चौथ पर चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाना चाहिए. चंद्रमा को जल, दूध या अक्षत से अर्घ्य अर्पित कर गणेशजी से परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है. पारण के समय हल्का और सात्विक भोजन करना उत्तम माना गया है. कई श्रद्धालु पहले प्रसाद ग्रहण करते हैं और फिर भोजन करते हैं. यह विधि व्रत की पूर्णता और शुभ फल की प्राप्ति का संकेत मानी जाती है|
व्रत में क्या खाएं, क्या न खाएं?
सकट चौथ के व्रत में आहार का विशेष महत्व बताया गया है. जो श्रद्धालु फलाहार करते हैं, वे दिन में फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा और मूंगफली जैसे सात्विक पदार्थ ग्रहण कर सकते हैं. माघ मास होने के कारण तिल और गुड़ से बने पदार्थों का सेवन शुभ माना जाता है. व्रत के दौरान अन्न, नमक, मसालेदार भोजन, तामसिक और बासी भोजन से परहेज करना चाहिए. मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज और अत्यधिक तले हुए पदार्थ वर्जित माने गए हैं. शास्त्रों के अनुसार, शुद्ध और सीमित आहार से मन और शरीर दोनों में सात्विकता बनी रहती है, जिससे व्रत का आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ता है|
व्रत से मिलने वाला आध्यात्मिक और पारिवारिक फल:
शास्त्रों और पुराणों में सकट चौथ के व्रत को आत्मसंयम और आंतरिक संतुलन का साधन बताया गया है. यह व्रत व्यक्ति को अनुशासित जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा देता है, जिससे मन और शरीर दोनों में शुद्धता आती है. व्रत के दौरान सात्विक आहार, संयमित दिनचर्या और नियमपूर्वक पारण करने से मानसिक अशांति, भय और नकारात्मकता दूर होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह साधना जीवन में आने वाले संकटों को सहन करने की शक्ति प्रदान करती है. विशेष रूप से गृहस्थों के लिए यह व्रत पारिवारिक संबंधों में मधुरता, संतान सुख और मानसिक स्थिरता लाने में सहायक माना गया है|
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