धर्म-अध्यात्म

धर्म: सुंदरकांड की यह चौपाई है बहुत चमत्कारी, जानें इसका महत्व

Sarita
30 Aug 2025 11:27 AM IST
धर्म: सुंदरकांड की यह चौपाई है बहुत चमत्कारी, जानें इसका महत्व
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धर्म: सनातन धर्म में जहां सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित होता है. ठीक उसी प्रकार मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी महाराज को समर्पित है. अगर इस दिन सच्चे मन से हनुमान चालीसा अथवा सुंदरकांड का पाठ व्यक्ति करता है तो उसे अत्यंत शुभ और शक्तिशाली फल की प्राप्ति भी होती है. सुंदरकांड रामचरितमानस का एक हिस्सा है, जो बजरंगबली हनुमान को समर्पित है. सनातन धर्म में सुंदरकांड और रामचरितमानस का विशेष महत्व है. सुंदरकांड की चौपाई का जाप करने से मान्यता के अनुसार आध्यात्मिक मानसिक भावनात्मक और भौतिक रूप से मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं. ऐसी स्थिति में चलिए सुंदरकांड के कुछ दोहे के बारे में आज हम आपको इस रिपोर्ट में विस्तार से बताते हैं|
दरअसल संतों का ऐसा कहना है कि अगर आप कोई भी चौपाई अथवा दोहे का अनुसरण कर रहे हैं, तो उसका फल आपको तभी प्राप्त होगा जब आप उसका अर्थ समझ रहे हो. ऐसी स्थिति में रामचरितमानस के सुंदरकांड में एक दोहा है ‘करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं,
कहुँ महिष मानषु धेनु खर अज खल निसाचर भच्छहीं, एहि लागि तुलसीदास इन्ह की कथा कछु एक है कही, रघुबीर सर तीरथ सरीरन्हि त्यागि गति पैहहिं सही’ सुंदरकांड के इस दोहे में लंका की रक्षा और राक्षसों की गतिविधियों का वर्णन किया गया है. जिसके बारे में राम कचहरी चारों धाम मंदिर के महंत शशिकांत दास विस्तार से बताते हैं.
करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं….अर्थात लंका की रक्षा के लिए बहुत से योद्धा तैयार हैं, जो अपने प्राणों की परवाह किए बिना लंका की रक्षा कर रहे हैं|
कहुँ महिष मानषु धेनु खर अज खल निसाचर भच्छहीं, एहि लागि तुलसीदास इन्ह की कथा कछु एक है कही…अर्थात लंका के राक्षस ऐसे हैं जो भैंस मनुष्य गए जैसे जीव जंतु को खा रहे हैं. गोस्वामी तुलसीदास जी ने इन राक्षसों की कथा संक्षेप में बताई है|
रघुबीर सर तीरथ सरीरन्हि त्यागि गति पैहहिं सही…अर्थात जो लोग प्रभु राम के सरोवर में अपने शरीर को त्याग देंगे वह निश्चित रूप से मोक्ष को प्राप्त करेंगे|
शशिकांत दास बताते हैं कि रामचरितमानस के सुंदरकांड से लिया गया यह दोहा लंका में राक्षस गतिविधि और प्रभु राम की भक्ति के महत्व को दर्शाता है. इस दोहे का अनुसरण करने से प्रभु राम के साथ पवन पुत्र हनुमान की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है|
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