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धर्म-अध्यात्म
धर्म: रुद्राक्ष और जप माला में 108 मनके होते हैं, 108 का इतना महत्व क्यों है
Sarita
21 Jun 2025 7:29 AM IST

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धर्म: हिंदू धर्म और सनातन परंपरा में 108 सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि दिव्य विज्ञान और ब्रह्मांडीय रहस्य का प्रतीक है। चाहे रुद्राक्ष माला हो, जपमाला हो या योगासनों की गिनती, यह संख्या हर जगह किसी न किसी रूप में गूंजती है। लेकिन 108 इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
वैदिक गणित का गूढ़ अर्थ को समझे :
संख्यात्मक दृष्टि से 108 कई रहस्यों से भरी है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, 9 ग्रह और 12 राशियों का गुणनफल (9 × 12 = 108) इस संख्या को विशेष बनाता है. यह मान्यता है कि हर व्यक्ति के जीवन पर इन 108 प्रकार की ऊर्जा या प्रभाव काम करते हैं|
ब्रह्मांडीय विज्ञान और खगोलीय संबंध क्या है:
आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 108 गुना अपनी-अपनी व्यास दूरी पर स्थित हैं|
सूर्य की दूरी ≈ 108 × सूर्य का व्यास:
चंद्रमा की दूरी ≈ 108 × चंद्रमा का व्यास:
यह संयोग नहीं, बल्कि एक सूक्ष्म ब्रह्मांडीय संतुलन है, जिससे पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाया है. योग और ध्यान में माना जाता है कि मानव शरीर में 108 प्रमुख ऊर्जा-नाड़ियाँ हैं, जो हृदय (अनाहत चक्र) में केंद्रित होती हैं. जब कोई साधक जापमाला के 108 मनकों से मंत्रों का उच्चारण करता है, तो यह सभी 108 ऊर्जा-प्रवाहों को सक्रिय करता है|
108 मनकों के साथ जाप करने से यह सुनिश्चित होता है कि साधक पूरे मन, शरीर और आत्मा को एक बार में केंद्रित कर सके. इसे पूर्णता का प्रतीक भी माना जाता है|
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