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धर्म-अध्यात्म
धर्म: गणेश संकट नाशन स्तोत्र का पाठ दूर कर देगा हर कष्ट, बुधवार और चतुर्थी पर जरूर पढ़ें
Sarita
23 Nov 2025 12:46 PM IST

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धर्म: संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करने के फायदे स्वयं महर्षि नारद ने बताए हैं. यह गणेश स्तुति करने से सारे संकटों से मुक्ति मिलती है. धन-संपदा मिलती है, संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है. साथ ही मोक्ष पाने की इच्छा भी पूरी होती है. रोग-बीमारी दूर होते हैं. यहां पढ़ें संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित.
संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये ॥१ ॥
नारदजी बोले – पार्वती नन्दन देवदेव श्री गणेशजी को सिर झुकाकर प्रणाम करते हुए अपनी आयु , कामना और अर्थ की सिद्धि के लिये उन भक्तनिवास का नित्यप्रति स्मरण करे ॥ 1 ॥
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥ २ ॥
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥ ३ ॥
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥ ४ ॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥ ५ ॥
अर्थ- पहला वक्रतुण्ड अर्थात टेढ़ी सूंडवाले , दूसरा एकदन्त अर्थात एक दाँतवाले, तीसरा कृष्णपिङ्गाक्ष अर्थात काली और भूरी नेत्रों वाले, चौथा गजवक्त्र अर्थात हाथी के समान मुखवाले, पाँचवाँ लम्बोदर अर्थात बड़े उदर वाले, छठा विकट अर्थात विकराल, सातवाँ विघ्नराजेंद्र अर्थात विघ्नों का शासन करनेवाले राजाधिराज, आठवाँ धूम्रवर्ण अर्थात धूसर वर्णवाले, नवाँ भालचन्द्र अर्थात जिसके ललाट पर चन्द्रमा शोभायमान है, दसवाँ विनायक , ग्यारहवाँ गणपति और बारहवाँ गजानन— इन बारह नामों का जो भी पुरुष तीनों सन्ध्याओं, अर्थात प्रातः , मध्याह्न और सायंकाल में पाठ करता है , हे प्रभो ! उसे किसी भी प्रकार के विघ्न का भय नहीं रहता ; इस प्रकार का स्मरण सभी सिद्धियाँ को प्रदान करने वाला होता है ॥2–5 ॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥ ६ ॥
अर्थ- इससे विद्या की अभिलाषा रखने वाला विद्या को, धन की अभिलाषा रखने वाला धन को, पुत्र की इच्छा रखने वाला पुत्र को तथा मोक्ष की अभिलाषा रखने वाला मोक्षगति को प्राप्त कर लेता है ॥ 6 ॥
जपेद् गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥७ ॥
अर्थ- जो इस गणपति स्तोत्र का जप करता है , उसे छः माह के अंदर इच्छित फल प्राप्त हो जाता है तथा एक वर्ष के भीतर पूर्ण सिद्धि प्राप्त हो जाती है ; इसमें किसी भी प्रकार का कोई सन्देह नहीं है ॥ 7 ॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥ ८ ॥
अर्थ- जो पुरुष इसे लिखकर आठ ब्राह्मणों को समर्पण करता है , गणेशजी की कृपा से उसे सब प्रकार की विद्या प्राप्त हो जाती है ॥ 8 ॥
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