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धर्म-अध्यात्म
Shukrawar के दिन पूजा के समय पढ़ें ये व्रत कथा, सुख समृद्धि की होगा प्राप्ति
Tara Tandi
28 Feb 2025 3:16 PM IST

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ज्योतिष न्यूज़ : सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी देवता की पूजा को समर्पित हैं वही शुक्रवार का दिन धन वैभव और सुख समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी के लिए खास माना गया है इस दिन भक्त देवी मां की विधिवत पूजा करते हैं और व्रत आदि भी रखते हैं
माना जाता है कि ऐसा करने से लक्ष्मी कृपा प्राप्त होती है लेकिन इसी के साथ ही अगर शुक्रवार के दिन लक्ष्मी पूजा के दौरान अगर व्रत कथा का पाठ किया जाए तो माता लक्ष्मी जल्द प्रसन्न होकर कृपा करती हैं और आर्थिक लाभ प्रदान करती हैं, तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा व्रत कथा बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।
पूजा के समय सुनें ये व्रत कथा
पैराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है, एक नगर में शीला नाम की एक गरीब महिला रहती थी. वह अपने पति और बच्चों के साथ बहुत कठिनाई से जीवन यापन कर रही थी. शीला धार्मिक प्रकृति की और संतोष स्वभाव वाली थी. उनका पति भी विवेक और सुशील था.
शीला और उसका पति कभी किसी की बुराई नहीं करते थे और प्रभु भजन में अच्छी तरह समय व्यतीत कर रहे थे. शहर के लोग उनकी गृहस्थी की सराहना करते थे. देखते ही देखते समय बदल गया. शीला का पति बुरे लोगों से दोस्ती कर बैठा.
अब वह जल्द से जल्द करोड़पति बनने के ख्वाब देखने लगा. इसलिए वह गलत रास्ते पर चल पड़ा फलस्वरूप वह रोडपति बन गया. यानी रास्ते पर भटकते भिखारी जैसी उसकी हालत हो गई थी. शीला को पति के बर्ताव से बहुत दुःख हुआ, किन्तु वह भगवान पर भरोसा कर सबकुछ सहने लगी. वह अपना अधिकांश समय प्रभु भक्ति में बिताने लगी. अचानक एक दिन दोपहर को उनके द्वार पर किसी ने दस्तक दी. शीला ने द्वार खोला तो देखा कि एक मांजी खड़ी थी. उसके चेहरे पर अलौकिक तेज निखर रहा था. उनकी आंखों में से मानो अमृत बह रहा था.
शीला कुछ समझ नहीं पा रही थी. फिर मांजी बोलीं- ‘तुम बहुत दिनों से मंदिर नहीं आई अतः मैं तुम्हें देखने चली आई.’ मांजी के अति प्रेमभरे शब्दों से शीला का हृदय पिघल गया. उसकी आंखों में आंसू आ गए और वह बिलख-बिलखकर रोने लगी. मांजी ने कहा-‘बेटी! सुख और दुःख तो धूप और छांव जैसे होते हैं. धैर्य रखो बेटी! मुझे तेरी सारी परेशानी बता.’ उसने मांजी को अपनी सारी कहानी कह सुनाई. कहानी सुनकर मांजी ने कहा- ‘कर्म की गति न्यारी होती है. हर इंसान को अपने कर्म भुगतने ही पड़ते हैं. इसलिए तू चिंता मत कर. अब तू कर्म भुगत चुकी है. अब तुम्हारे सुख के दिन अवश्य आएंगे.
बूढ़ी महिला (मांजी) ने उसे मां वैभव लक्ष्मी व्रत के बारे में बताया. बूढ़ी महिला ने उसे व्रत की विधि और महत्व समझाया. शीला ने श्रद्धा और भक्ति भाव से मां वैभव लक्ष्मी का व्रत रखना शुरू किया. उसने हर शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा की और व्रत कथा सुनी. धीरे-धीरे, उसके जीवन में बदलाव आने लगे. उसके पति को एक अच्छी नौकरी मिल गई और उनके घर में धन-धान्य की वृद्धि होने लगी.
शीला ने 21 शुक्रवार तक मां वैभव लक्ष्मी का व्रत रखा और फिर विधि-विधान से उद्यापन किया. उसने 7 महिलाओं को मां वैभव लक्ष्मी व्रत की पुस्तकें भेंट कीं और उन्हें भोजन कराया. मां वैभव लक्ष्मी की कृपा से शीला और उसके परिवार का जीवन सुखमय हो गया.
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