धर्म-अध्यात्म

Ratha Saptami 2026: जानिए कब है रथ सप्तमी शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Sarita
21 Jan 2026 7:35 AM IST
Ratha Saptami 2026:    जानिए कब है रथ सप्तमी  शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
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Ratha Saptami 2026: सनातन धर्म में सूर्य को ऊर्जा, आरोग्य और जीवन का आधार माना गया है। माघ मास में आने वाली रथ सप्तमी सूर्य उपासना का विशेष पर्व है, जो 'अचला सप्तमी' और 'सूर्य जयंती' भी कहलाती है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव अपने दिव्य रथ पर सवार होकर पहली बार पृथ्वी पर प्रकट हुए थे। कहा जाता है कि इस दिन सूर्य उपासना करने से आरोग्य, धन और सूर्य की तरह समाज में यश प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। यही कारण है कि इस दिन स्नान, दान, व्रत और सूर्य पूजा का विशेष महत्व होता है। यहां जानिए रथ सप्तमी 2026 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि आदि।
रथ सप्तमी का धार्मिक महत्व :
माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रथ सप्तमी, माघी सप्तमी, अचला सप्तमी, सूर्य जयंती और महती सप्तमी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में सूर्य देव की पहली किरण इसी तिथि को पृथ्वी पर पड़ी थी। पद्म पुराण और भविष्य पुराण में इस व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि इस दिन विधि-विधान से सूर्य पूजा करने से पापों का नाश होता है और उत्तम लोक की प्राप्ति होती है।
रथ सप्तमी 2026 कब है:
पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का आरंभ 24 जनवरी 2026 को रात 12:40 बजे होगा और इसका समापन 25 जनवरी को रात 11:11 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार, रथ सप्तमी का पर्व 25 जनवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस दिन सूर्य जयंती भी है और रविवार सूर्य देव को समर्पित होता है।
रथ सप्तमी 2026 स्नान और पूजा का शुभ मुहूर्त:
स्नान का उत्तम समय: सुबह 5:32 बजे से 7:12 बजे तक
पूजा और दान का शुभ मुहूर्त: सुबह 11:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
इस समय में सूर्य देव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
सूर्य देव को अर्घ्य देने की सही विधि :
रथ सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। माना जाता है कि स्नान के समय सिर पर आक के पत्ते रखने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे में शुद्ध जल में लाल चंदन, कुमकुम, लाल फूल, अक्षत और थोड़ा सा गुड़ भी मिलाएं। सूर्योदय के समय सूर्य की ओर मुख करके खड़े हों और जल की धारा सूर्य देव को अर्पित करें। ध्यान रखें कि जल की धारा के बीच से सूर्य के दर्शन करें।
सूर्य पूजन मंत्र :
ॐ घृणि सूर्याय नमः
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥
अर्घ्य देते समय न करें ये गलतियां
अर्घ्य देते समय जल पैरों पर न गिरे, इसके लिए नीचे पात्र रखें। बिना स्नान किए सूर्य को जल न चढ़ाएं और पूजा के समय चप्पल न पहनें। अर्घ्य का जल बाद में किसी पौधे की जड़ में डाल दें।
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