धर्म-अध्यात्म

Magh Purnima 2026 पर रवि-पुष्य योग का दुर्लभ संयोग

Harrison
18 Jan 2026 9:27 PM IST
Magh Purnima 2026 पर रवि-पुष्य योग का दुर्लभ संयोग
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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिंदू पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा का पर्व हर वर्ष माघ महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा 1 फरवरी, रविवार को पड़ेगी। इस दिन एक विशेष और दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे रवि-पुष्य योग कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह योग अत्यंत शुभ माना जाता है और इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
माघ पूर्णिमा माघ महीने का अंतिम महत्वपूर्ण पर्व होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने और व्रत रखने की परंपरा है। माना जाता है कि माघ मास में किया गया स्नान और दान जीवन के पापों को दूर करता है और मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति कराता है। विशेष रूप से गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा और गोदावरी जैसी नदियों में स्नान का धार्मिक महत्व बताया गया है।
इस वर्ष माघ पूर्णिमा पर रवि-पुष्य योग बनने से इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। रवि-पुष्य योग तब बनता है जब रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र होता है। यह योग धन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस योग में किया गया दान, खरीदारी और धार्मिक कार्य लंबे समय तक फल देते हैं।
माघ पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त से स्नान-दान करना सबसे उत्तम माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु और शिव की पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन सत्यनारायण कथा भी करते हैं। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और धन का दान करना विशेष फलदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ पूर्णिमा पर किया गया दान कभी निष्फल नहीं जाता। इस दिन दान करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियां कम होती हैं। माघ पूर्णिमा को माघ मेले का भी समापन माना जाता है। उत्तर भारत के कई हिस्सों, खासकर प्रयागराज में, इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम में स्नान करते हैं।
माघ पूर्णिमा का संबंध साधु-संतों और कल्पवास की परंपरा से भी जुड़ा है। कल्पवासी माघ मास के दौरान नदी तट पर रहकर नियम, संयम और साधना का पालन करते हैं और पूर्णिमा के दिन विशेष पूजा के साथ कल्पवास का समापन करते हैं।
इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु फलाहार करते हैं और शाम को पूर्णिमा की पूजा के बाद व्रत खोलते हैं। माना जाता है कि माघ पूर्णिमा का व्रत रखने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि माघ पूर्णिमा के दिन किए गए पुण्य कर्म जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। यही कारण है कि इस दिन स्नान-दान को विशेष महत्व दिया गया है।
कुल मिलाकर, 1 फरवरी 2026 को पड़ने वाली माघ पूर्णिमा रवि-पुष्य योग के कारण बेहद खास मानी जा रही है। इस शुभ अवसर पर श्रद्धालु स्नान, दान और पूजा-पाठ कर धर्म लाभ अर्जित कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन आत्मिक शुद्धि, पुण्य और सौभाग्य की प्राप्ति का अवसर प्रदान करता है।
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