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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : नर्मदा जयंती हर साल पूरे भारत में बड़े धार्मिक उल्लास के साथ मनाई जाती है। यह पर्व नर्मदा नदी के पूजन और उसकी पवित्रता के महत्व को समर्पित होता है। नर्मदा नदी, जिसे 'रेवा' भी कहा जाता है, भारतीय धर्म और संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, नर्मदा के तट पर स्नान और उसकी पूजा मात्र से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2026 में नर्मदा जयंती की शुभ तिथि
इस वर्ष नर्मदा जयंती 2026 में वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि को मनाई जाएगी। यह दिन खासतौर पर नर्मदा स्नान, नदी के तट पर पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ माना जाता है। भक्तगण इस दिन विशेष रूप से नर्मदा आरती, हवन और मंदिरों में पूजा-पाठ में भाग लेते हैं।
धार्मिक महत्व
नर्मदा नदी को हिन्दू धर्म में माता के रूप में पूजनीय माना जाता है। पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, नर्मदा में स्नान और उसकी सेवा करने से व्यक्ति के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। नर्मदा यात्रा या 'नर्मदा सप्तश्रृंगी यात्रा' विशेष रूप से धार्मिक दृष्टि से महत्व रखती है। यह यात्रा हजारों श्रद्धालुओं को मोक्ष के मार्ग की अनुभूति कराती है।
पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि भगवान शिव और देवी पार्वती भी नर्मदा तट पर पूजा और ध्यान करते थे। नर्मदा नदी के तट पर स्थित कई प्राचीन मंदिर और तीर्थ स्थल, जैसे ओंकारेश्वर, महेश्वर और अमरकंटक, तीर्थ यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इन स्थानों पर दर्शन और पूजा करने से आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
नर्मदा जयंती पर पूजा का तरीका
इस दिन सुबह-सुबह नर्मदा नदी के तट पर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्तगण पूजा के लिए फूल, दीपक और नैवेद्य लेकर आते हैं। विशेष मंत्रों के जाप और आरती के माध्यम से नर्मदा की महिमा का सम्मान किया जाता है। लोग अपने परिवार और समाज की खुशहाली के लिए हवन और दान भी करते हैं।
विशेषकर नर्मदा जयंती पर स्नान करने और नर्मदा के दर्शन करने का धार्मिक विश्वास यह है कि यह मानव जीवन के कष्टों और पापों को धोकर आत्मा को शुद्ध करता है। पुराणों में वर्णित है कि नर्मदा नदी में डुबकी लगाने से चार योनियों के जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है। इसलिए इसे मोक्ष प्रदायक नदी कहा गया है।
समाजिक और सांस्कृतिक पहलू
नर्मदा जयंती केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों का अवसर भी है। इस दिन कई स्थानों पर मेले, धार्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ इस पर्व में शामिल होकर धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था प्रदर्शित करते हैं।
निष्कर्ष
नर्मदा जयंती 2026 न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह आध्यात्मिक अनुभव और मोक्ष की अनुभूति का अवसर भी प्रदान करता है। इस दिन नर्मदा नदी के तट पर स्नान, पूजा और अनुष्ठान करने से जीवन में शांति, समृद्धि और पापों से मुक्ति की प्राप्ति होती है। सभी भक्तगण इस शुभ अवसर पर नर्मदा के दर्शन कर अपने जीवन में आध्यात्मिक संतोष और आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
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