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धर्म-अध्यात्म
Radha Ashtami 2025: राधा अष्टमी पर करें ये खास उपाय, शीघ्र विवाह का सुख मिलेगा
Sarita
31 Aug 2025 7:27 AM IST
Radha Ashtami 2025: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन श्री राधारानी का प्राकट्य हुआ था और तभी से यह पर्व भक्ति और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु उपवास रखते हैं, राधा-कृष्ण की पूजा करते हैं और राधारानी से जुड़े मंत्रों का जप कर उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। माना जाता है कि राधाष्टमी का व्रत रखने से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है तथा साधक को पुण्य की प्राप्ति के साथ पापों से मुक्ति भी मिलती है।
धार्मिक मान्यता है कि राधाष्टमी के दिन किए गए विशेष उपाय जीवन की अनेक बाधाओं को दूर कर सकते हैं। विशेष रूप से विवाह में आ रही अड़चनें इस दिन के उपायों से समाप्त हो जाती हैं। भक्त राधा-कृष्ण की भक्ति में लीन होकर पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित करते हैं और भक्ति गीतों का आयोजन करते हैं। ऐसे में आइये जानते हैं राधाष्टमी कब है और इसके महत्व और उपायों के बारे में ।
राधाष्टमी का शुभ मुहूर्त 2025:
राधाष्टमी का पर्व इस बार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि की शुरुआत 30 अगस्त 2025 को रात 10:46 बजे होगी और इसका समापन 31 अगस्त 2025 को देर रात 12:57 बजे होगा। चूँकि उदया तिथि 31 अगस्त को पड़ रही है, इसलिए व्रत और पूजा इसी दिन की जाएगी।
राधारानी के इस पावन जन्मोत्सव को इस्कॉन मंदिरों में भी 31 अगस्त को धूमधाम से मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, राधाष्टमी की पूजा का सबसे शुभ समय मध्याह्न काल होता है। इस वर्ष पूजा का विशेष मुहूर्त 31 अगस्त को सुबह 10:42 बजे से दोपहर 1:14 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में राधा-कृष्ण की आराधना करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में प्रेम, भक्ति और समृद्धि का संचार होता है।
राधा अष्टमी 2025 के विशेष उपाय:
विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए
राधा अष्टमी के दिन राधा-कृष्ण जी के युगल स्वरूप की पूजा करें और श्रद्धापूर्वक श्रीराधा रानी को गुलाब के फूल अर्पित करें। पूजा के बाद “राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र” का पाठ करें। मान्यता है कि इस उपाय से राधारानी की कृपा प्राप्त होती है और अविवाहित जातकों के विवाह में आ रही रुकावटें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। इससे विवाह के योग शीघ्र बनने लगते हैं।
शुभ दान से खुलते हैं भाग्य के द्वार:इस पावन अवसर पर गुप्त रूप से दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। राधाष्टमी के दिन तिल का दान अवश्य करें। इसके अलावा उड़द की दाल, काले कपड़े और लोहे से बनी वस्तुओं का दान भी करें। ऐसा करने से जातक के विवाह में आ रही अड़चनें दूर हो सकती हैं। साथ ही, यह दान मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति में भी सहायक होता है।
विवाह योग के लिए मंत्र जाप:
अविवाहित जातकों को इस दिन पूजा के दौरान “ॐ ह्रीं श्री राधिकायै नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए। इस मंत्र से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
प्रेम विवाह की इच्छा रखने वालों को राधा अष्टमी पर “ॐ क्लीं कृष्णाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा” मंत्र का जाप करना चाहिए। कम से कम 5 माला जाप करने से रिश्तों में मजबूती आती है और इच्छित विवाह का मार्ग प्रशस्त होता है
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