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Pradosh Vrat: क्या प्रदोष और महाशिवरात्रि का व्रत एक ही दिन रखा जाएगा? जानें सही तिथियां और पूजा मुहूर्त

Sarita
10 Feb 2026 6:55 AM IST
Pradosh Vrat: क्या प्रदोष और महाशिवरात्रि का व्रत एक ही दिन रखा जाएगा? जानें सही तिथियां और पूजा मुहूर्त
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Pradosh Vrat: महाशिवरात्रि का पर्व शिव की आराधना के लिए बहुत बड़ा अवसर माना जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शिव परिवार की उपासना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही वैवाहिक जीवन भी मधुरमय बनता है। महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इसके अलावा शिव भक्तों के लिए प्रदोष व्रत भी बेहद खास दिन होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। ऐसे में कई बार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष पर रखा जाने वाला प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि व्रत एक ही दिन पड़ने का संयोग देखने को मिलता है। आइए जानते हैं कि इस साल प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि का व्रत किस दिन रखा जाएगा।
कब है महाशिवरात्रि 2026?
इस साल फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे पर होगी।
इस तिथि का समापन 16 फरवरी की शाम 5:34 बजे होगा।
महाशिवरात्रि की मुख्य पूजा प्रदोष काल (शाम) और निशिता काल (मध्यरात्रि) में की जाती है।
ऐसे में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।
महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त 2026:
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 06:39 से 09:45
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय -शाम 09:45 से 12:52
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - सुबह 12:52 से 03:59
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - सुबह 03:59 से 07:06
निशिता काल पूजा समय - सुबह 12:28 से 01:17
फाल्गुन प्रदोष व्रत 2026:
इस साल फाल्गुन मास की कृष्ण त्रयोदशी तिथि का आरंभ 14 फरवरी 2026 को शाम 4:01 बजे होगा।
इस तिथि का समापन 15 फरवरी 2026 को शाम 5:04 बजे हो रहा है।
प्रदोष काल के अनुसार, प्रदोष व्रत 14 फरवरी को रखा जाएगा, इस दिन शनिवार होने के कारण यह शनि प्रदोष होगा।
ऐसे में महाशिवरात्रि का व्रत और प्रदोष व्रत अलग-अलग दिन रखा जाएगा।
प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त:
प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 14 फरवरी 2026 को शाम 6:10 बजे से प्रारंभ होगा। यह मुहूर्त रात 8:44 बजे तक रहने वाला है। इस तिथि पर पूर्वाषाढा नक्षत्र और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है। ऐसे में महादेव की पूजा-अर्चना करना और भी लाभकारी हो सकता है।
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