धर्म-अध्यात्म

Pradosh Vrat: सावन प्रदोष, पूजा के दौरान करें ये आरती, सुख-समृद्धि से भर जाएगा जीवन

Sarita
6 Aug 2025 9:43 AM IST
Pradosh Vrat: सावन प्रदोष, पूजा के दौरान करें ये आरती, सुख-समृद्धि से भर जाएगा जीवन
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Pradosh Vrat: इस बार सावन का अंतिम प्रदोष व्रत 6 अगस्त 2025, बुधवार को पड़ेगा, जिसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा। यह व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक दुर्लभ अवसर है, खासकर सावन माह के अंतिम चरण में। हिंदू धर्म में, प्रदोष व्रत को भगवान शिव की पूजा के लिए बहुत ही फलदायी और पुण्यकारी व्रत माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाने से जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाला यह व्रत शिव भक्तों के लिए विशेष होता है और जब यह सावन जैसे पवित्र महीने में आता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। कहा जाता है कि प्रदोष व्रत करने से कर्ज, रोग, मानसिक तनाव और अन्य बाधाएं दूर होती हैं और शिव कृपा से जीवन में सुख-शांति आती है।
शिव जी की आरती :
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुणगु गाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
देव वधुजहं गावत नृत्य कर ताथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
शुम्भ निशुम्भ विदारेहेमांचल स्याता
सहस भुजा तनुधरिके चक्र लियो हाथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
देवन अरज करत हम चित को लाता
गावत दे दे ताली मन मेंरंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।
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