धर्म-अध्यात्म

Pongal 2026: जानें पोंगल का त्योहार क्यों और कैसे मनाया जाता है,नियम और महत्व

Sarita
11 Jan 2026 10:41 AM IST
Pongal 2026: जानें  पोंगल का त्योहार क्यों और कैसे मनाया जाता है,नियम और महत्व
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Pongal 2026: पोंगल दक्षिण भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाने वाला चार दिनों का फसल उत्सव है। यह त्योहार हर साल माघ महीने में मनाया जाता है। इसे नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। पोंगल शब्द का मतलब है उबालना या उमड़ना। यह त्योहार बारिश के देवता इंद्र, सूर्य देवता और जानवरों के प्रति, खासकर अच्छी फसल और समृद्धि के लिए आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन चावल से बनी एक खास डिश बनाई जाती है, जिसे पोंगल भी कहा जाता है।
पोंगल कैसे मनाया जाता है?
पोंगल सूर्य के उत्तर दिशा में जाने के साथ शुरू होता है, जिसे मकर संक्रांति भी कहा जाता है। यह त्योहार चार दिनों तक मनाया जाता है। पहला दिन भोगी पोंगल, दूसरा दिन थाई पोंगल, तीसरा दिन मट्टू पोंगल और चौथा दिन कानम पोंगल होता है।
भोगी पोंगल इस चार दिवसीय त्योहार का पहला दिन है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं। घर से पुरानी, ​​टूटी-फूटी और बेकार चीजें हटा दी जाती हैं। इस दिन को घर और जीवन से नकारात्मकता को दूर करने और सकारात्मकता के साथ नई शुरुआत करने का प्रतीक माना जाता है। यह दिन भगवान इंद्र को समर्पित है।
थाई पोंगल:
थाई पोंगल सूर्य देवता को समर्पित है। इस दिन भगवान सूर्य और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। अच्छी फसल की खुशी मनाने के लिए प्रसाद के रूप में चावल की खीर और अन्य मीठे पकवान बनाए जाते हैं।
मट्टू पोंगल:
मट्टू पोंगल को त्योहार का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन खेती और कृषि कार्यों में मदद करने वाले जानवरों, जैसे गाय और बैलों का सम्मान किया जाता है और उनके प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। इस अवसर पर जानवरों की पूजा की जाती है और उन्हें विशेष भोजन दिया जाता है।
कानम पोंगल इस त्योहार का आखिरी दिन है। इस दिन खुले में हल्दी के पत्तों पर सुपारी, गन्ने का रस और पोंगल पकवान रखा जाता है। इस अवसर पर लोग अपने परिवार और रिश्तेदारों से मिलते हैं। सामाजिक समारोह भी आयोजित किए जाते हैं।
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