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धर्म-अध्यात्म
Pitru Paksha 2025 :मृत्यु के बाद पहला श्राद्ध करने के क्या हैं नियम, जानें धार्मिक कारण
Sarita
8 Sept 2025 11:36 AM IST

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Pitru Paksha 2025: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है। ऐसा करने से पूर्वज और मृतात्माएँ तृप्त होती हैं। वर्ष 2025 में पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू हो रहा है जो 22 सितंबर यानी सर्व पितृ अमावस्या तक चलेगा।
पितृ पक्ष के दौरान पितरों का तर्पण और पिंडदान करना शुभ माना जाता है, मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। लेकिन श्राद्ध करने के कई नियम हैं जिनका पालन करना आवश्यक है। जानें किसी की मृत्यु के बाद पहला श्राद्ध कब करना चाहिए। श्राद्ध करने के क्या नियम हैं, जानें इसका धार्मिक कारण।
कई बार लोग सही जानकारी के अभाव में किसी की मृत्यु के बाद श्राद्ध कर देते हैं। लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए और पहले वर्ष में श्राद्ध नहीं करना चाहिए।
प्रथम श्राद्ध से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें:
पहला श्राद्ध एक वर्ष पूरा होने पर करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, मृत्यु के बाद जब मृतक की पहली पुण्यतिथि आती है, तो पहला श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध कर्म हमेशा तिथि के अनुसार ही करें। यदि आप तिथि की गणना नहीं कर सकते, तो किसी पंडित से तिथि के बारे में पूछ सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु किसी भी माह के शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की किसी भी तिथि, अर्थात प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया आदि को हुई हो, तो उन लोगों का श्राद्ध पितृ पक्ष में उसी तिथि को किया जाता है।
तिथि के अनुसार ही श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। श्राद्ध हमेशा उसी तिथि को करना चाहिए जिस तिथि को मृत्यु हुई हो।
यदि किसी की पुण्यतिथि पितृ पक्ष में आती है, तो उस दिन किया गया श्राद्ध और भी अधिक फलदायी माना जाता है।
पितृ की वार्षिक पुण्यतिथि के बाद श्राद्ध किया जा सकता है। इसलिए कोशिश करें कि वार्षिक पुण्यतिथि तक श्राद्ध न करें। वार्षिक या पुण्यतिथि व्यक्ति की मृत्यु के एक वर्ष के भीतर होती है। किसी का भी पहला श्राद्ध आत्मा को शांति और संतुष्टि देता है। श्राद्ध कर्म करने से पितरों का आशीर्वाद और कृपा प्राप्त होती है।
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