- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- Pitru Paksha 2025:...
धर्म-अध्यात्म
Pitru Paksha 2025: चंद्र ग्रहण के साथ शुरू होगा पितृ पक्ष , कब और कैसे करें पितरों को जल अर्पित
Sarita
6 Sept 2025 7:36 AM IST

x
Pitru Paksha 2025 : पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा के अगले दिन से पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) शुरू होता है, जो अमावस्या तक चलता है। लेकिन इस बार पितृ पक्ष एक विशेष खगोलीय घटना के साथ शुरू हो रहा है। दरअसल, साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 को लगने वाला है और इसी दिन से पितृ पक्ष भी शुरू हो जाएगा। ग्रहण और पितृ पक्ष का यह संगम धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
चंद्र ग्रहण कब लगेगा?
साल 2025 का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025, रविवार को लगेगा। यह ग्रहण रात 11:22 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:10 बजे समाप्त होगा। यह एक उपछाया चंद्र ग्रहण होगा, यानी पृथ्वी की बाहरी छाया चंद्रमा पर पड़ेगी, जिससे चंद्रमा की चमक थोड़ी फीकी पड़ जाएगी। उपछाया ग्रहण होने के कारण, इसमें कोई सूतक काल नहीं होगा।
क्या इसका पितृ पक्ष पर कोई प्रभाव पड़ेगा?
चूँकि यह उपछाया चंद्र ग्रहण है और इसमें कोई सूतक काल नहीं है, इसलिए पितृ पक्ष के नियमों पर इसका कोई विशेष नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालाँकि, कुछ ज्योतिषियों और धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ग्रहण का समय थोड़ा संवेदनशील होता है, इसलिए ग्रहण के दौरान पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने से बचना चाहिए। ग्रहण के दौरान भोजन बनाना और खाना वर्जित माना जाता है। इसके अलावा, इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान और शुभ कार्य भी नहीं किए जाते हैं। हालाँकि, पितृ पक्ष के तर्पण और श्राद्ध कार्यों पर ग्रहण का कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पितृ पक्ष का महत्व:
पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध भी कहा जाता है, अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का समय है। इन 15 दिनों में, हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं।
तर्पण क्या है और इसे कैसे करें?
तर्पण का अर्थ है 'तृप्त करना'। पितृ पक्ष में पितरों को जल, तिल और कुशा से तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से हमारे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और हमें आशीर्वाद देते हैं।
तर्पण विधि:
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
तांबे के बर्तन में स्वच्छ जल, काले तिल और थोड़े से चावल लें।
पितरों का आह्वान करते हुए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
हाथों में कुश की अंगूठी पहनें।
दोनों हाथों की हथेलियों में जल, तिल और चावल लेकर 'ॐ पितृभ्य: नमः' मंत्र का तीन बार जाप करें।
अब हथेली में रखे जल को धीरे-धीरे ज़मीन पर गिराएँ और पितरों का ध्यान करें।
यह क्रिया करते समय अपने गोत्र और पितरों का नाम लें।
तर्पण के अलावा, पितृ पक्ष में श्राद्ध और पिंडदान भी किया जाता है। श्राद्ध का अर्थ है 'श्रद्धापूर्वक किया गया कर्म'। इसमें पितरों के लिए भोजन बनाकर ब्राह्मणों को खिलाया जाता है। पिंडदान में आटे, चावल या जौ के आटे से बनी गोल लोइयां चढ़ाई जाती हैं, जिन्हें पितरों के लिए भोजन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
Next Story





