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धर्म-अध्यात्म
Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष में द्वादशी श्राद्ध कल, इस तरह करें पिंडदान, पितर प्रसन्न होंगे और देंगे आशीर्वाद
Sarita
17 Sept 2025 9:50 AM IST

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Pitru Paksha 2025: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। इसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, यह वह अवधि है जिसमें लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं। मान्यता है कि इस दौरान किए गए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्मों से पूर्वज तृप्त होते हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसी संदर्भ में, द्वादशी श्राद्ध इस गुरुवार, 18 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। यह श्राद्ध मुख्य रूप से द्वादशी तिथि को दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए किया जाता है। हालाँकि, कुछ लोग इसे गृहस्थ जीवन त्याग चुके तपस्वियों के लिए भी करते हैं। द्वादशी श्राद्ध को उचित रीति से करने से पूर्वजों की आत्मा तृप्त होती है और घर में सुख-शांति आती है।
द्वादशी श्राद्ध की सही विधि, पिंडदान कैसे करें:
श्राद्ध के दिन सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के दक्षिण दिशा की सफाई करें और गंगाजल छिड़क कर एक स्थान को शुद्ध करें। श्राद्ध अनुष्ठान के लिए आवश्यक सामग्री एकत्र करें। जैसे तिल, जौ, चावल, कुश, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी आदि पितरों को प्रिय व्यंजन तैयार करें। श्राद्ध का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजे के बाद शुरू होता है, इसलिए सभी तैयारियाँ समय पर कर लें। फिर सबसे पहले एक थाली में जौ का आटा, तिल और चावल मिलाकर पिंड बनाएँ। इसके बाद जल में तिल मिलाकर पितरों के लिए तर्पण करें। पिंडदान करने से पहले पितरों का आह्वान करें और उनसे श्राद्ध स्वीकार करने का अनुरोध करें।
पिंडों पर गंगाजल, दूध, शहद और पुष्प अर्पित करें। पिंड को धूप-दीप दिखाएँ और हाथ जोड़कर पितरों से प्रार्थना करें। श्राद्ध का सबसे महत्वपूर्ण भाग ब्राह्मणों को भोजन कराना है। कम से कम एक ब्राह्मण को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएँ। भोजन के बाद ब्राह्मण को दान-दक्षिणा दें और उनका आशीर्वाद लें। यदि ब्राह्मण को भोजन कराना संभव न हो, तो खाद्य सामग्री किसी जरूरतमंद को दान कर दें। पिंडदान के बाद पितरों का भाग मानकर भोजन का एक भाग कौओं के लिए, एक गाय के लिए और एक कुत्ते के लिए निकालें। ऐसा माना जाता है कि इन जीवों के माध्यम से भोजन सीधे पितरों तक पहुँचता है।
द्वादशी श्राद्ध का महत्व:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे अपने वंशजों को सभी दुखों से मुक्ति का आशीर्वाद देते हैं। द्वादशी श्राद्ध का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह उन पितरों को समर्पित होता है जो मृत्यु के बाद मोक्ष की तलाश में होते हैं। इस दिन विधिपूर्वक पिंडदान करने से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि परिवार में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं।
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