धर्म-अध्यात्म

Pithori Amavasya 2025: पिठोरी अमावस्या आज, इस कथा के बिना अधूरा है व्रत

Sarita
22 Aug 2025 6:43 AM IST
Pithori Amavasya 2025: पिठोरी अमावस्या आज, इस कथा के बिना अधूरा है व्रत
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Pithori Amavasya 2025: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। पिठोरी अमावस्या का व्रत 22 अगस्त, गुरुवार यानी आज रखा जा रहा है। इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ व्रत कथा का भी विशेष महत्व है।
पिठोरी अमावस्या के दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। पिठोरी अमावस्या के दिन आटे से 64 देवियाँ बनाकर उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है।
पिठोरी अमावस्या कथा:
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक गाँव में सात भाई रहते थे, जिनकी पत्नियाँ पिठोरी अमावस्या का व्रत रखती थीं। पहले वर्ष जब बड़े भाई की पत्नी ने व्रत रखा, तो उसके पुत्र की मृत्यु हो गई। दूसरे वर्ष भी यही हुआ। सातवें वर्ष जब यही हुआ, तो बड़े भाई की पत्नी ने अपने मृत पुत्र के शव को कहीं छिपा दिया।
उस समय गाँव की कुलदेवी माँ पोलेरम्मा गाँव की रक्षा कर रही थीं। उन्होंने दुखी माँ को देखा और कारण पूछा। माँ ने सारी बात बता दी। देवी को उस पर दया आ गई और उन्होंने माँ से कहा कि जहाँ उसके पुत्रों का दाह संस्कार किया गया था, वहाँ हल्दी छिड़कें।
माँ ने ऐसा ही किया। जब वह घर लौटी, तो उसने देखा कि उसके सातों पुत्र जीवित थे। यह देखकर उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तभी से उस गाँव की प्रत्येक माँ अपने बच्चों की लंबी आयु के लिए पिठोरी अमावस्या का व्रत रखने लगी।
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