धर्म-अध्यात्म

Paush Purnima 2026: आज है साल की पहली पूर्णिमा, स्नान-दान से मिलेंगे सुख-समृद्धि और शांति

Sarita
3 Jan 2026 7:24 AM IST
Paush Purnima 2026: आज है साल की पहली पूर्णिमा, स्नान-दान से मिलेंगे सुख-समृद्धि और शांति
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Paush Purnima 2026: सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। यह तिथि पौष मास के शुक्ल पक्ष में पड़ती है, और साल 2026 की पहली पूर्णिमा 3 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रमा अपनी सभी सोलह कलाओं से पूर्ण रहता है, जिसके कारण धार्मिक क्रियाओं का पुण्य अत्यधिक माना गया है।
पौष पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त:
पौष पूर्णिमा की तिथि 2 जनवरी 2026 को शाम 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी और 3 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। चूंकि पूर्णिमा का व्रत उदया तिथि के आधार पर रखा जाता है, इसलिए पौष पूर्णिमा का व्रत 3 जनवरी 2026 को रखना उचित होगा।
पौष पूर्णिमा पर पूजा और दान करने के लिए दो मुहूर्त सबसे शुभ माने जाते हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5 बजकर 13 मिनट से लेकर 6 बजकर 1 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 44 से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक।
मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त में पूजा और दान करना सबसे शुभ माना जाता है।
स्नान और पूजा का विशेष महत्व:
पौष पूर्णिमा पर स्नान, दान, सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। इसी दिन से प्रयागराज में होने वाले भारत के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक, माघ मेले का आयोजन भी शुरू होता है। इस दिन धार्मिक कर्मकांड करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।
पौष पूर्णिमा 2026 की पूजा विधि:
1. स्नान: सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा नदी में या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
2. संकल्प और अर्घ्य: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
3. विष्णु-लक्ष्मी पूजा: एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
4. अर्पण और जाप: पूजा में पीले फूल, तुलसी पत्र, चंदन, अक्षत, धूप-दीप, भोग और वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करें और तुलसी की माला से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
5. आरती और भोग: पूजा के अंत में गाय के घी के दीपक से आरती करें और भोग लगाएं। साधक दिन में एक बार फलाहार या सात्विक भोजन भी कर सकते हैं।
दान और रात्रि पूजा का महत्व:
पौष पूर्णिमा के दिन दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा संपन्न होने के बाद ब्राह्मणों और गरीब-जरूरतमंद लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, दूध या घी का दान अवश्य करना चाहिए। इसके अलावा, पौष पूर्णिमा की रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर प्रार्थना करना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा की रात में की गई आराधना शीघ्र फल प्रदान करती है।
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