धर्म-अध्यात्म

Parivartini Ekadashi 2025: परिवर्तिनी एकादशी पर क्यों की जाती है भगवान विष्णु की विशेष पूजा

Sarita
1 Sept 2025 8:09 AM IST
Parivartini Ekadashi 2025: परिवर्तिनी एकादशी पर क्यों की जाती है भगवान विष्णु की विशेष पूजा
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Parivartini Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हर माह शुक्ल और कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम व्रत माना जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी या जलझूलनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। आइए जानते हैं कि इस एकादशी पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा क्यों की जाती है और इसके पीछे क्या मान्यताएँ हैं।
परिवर्तिनी एकादशी 2025 कब है?
पंचांग के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी तिथि 3 सितंबर 2025 को प्रातः 3:53 बजे प्रारंभ होगी और यह तिथि अगले दिन यानी 4 सितंबर 2025 को प्रातः 4:21 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 3 सितंबर को ही रखा जाएगा।
इसे परिवर्तिनी एकादशी क्यों कहा जाता है?
परिवर्तिनी एकादशी को 'पद्मा एकादशी' और 'वामन एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है। इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहने के पीछे एक विशेष कारण है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में शयन करते हैं। कहा जाता है कि भाद्रपद माह की इस एकादशी पर भगवान विष्णु करवट बदलते हैं, अर्थात एक करवट से दूसरी करवट लेकर शयन मुद्रा में हो जाते हैं। इसी कारण इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
परिवर्तिनी एकादशी की पूजा विधि:
परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा विधि का पालन करना चाहिए। एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को एक आसन पर स्थापित करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी के पत्ते, अक्षत, रोली, चंदन और मिठाई या फल अर्पित करें। इस दिन परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा अवश्य पढ़ें। इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है। भगवान विष्णु की आरती करें और उनके मंत्रों का जाप करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ होता है। पूजा के बाद अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों और ज़रूरतमंदों को दान दें। इस दिन अन्न, वस्त्र या धन का दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी होता है।
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व:
परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। शास्त्रों में इस व्रत का बहुत महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति द्वारा जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस एकादशी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में सौभाग्य की वृद्धि होती है। पद्म पुराण के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें एक हजार अश्वमेध यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की भी पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन वामन रूप की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं।
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