धर्म-अध्यात्म

Parivartini Ekadashi 2025: जीवन में चल रही है उथल-पुथल, परिवर्तिनी एकादशी पर किया गया ये खास दान देगा राहत

Sarita
3 Sept 2025 7:33 AM IST
Parivartini Ekadashi 2025: जीवन में चल रही है उथल-पुथल, परिवर्तिनी एकादशी पर किया गया ये खास दान देगा राहत
x
Parivartini Ekadashi 2025:परिवर्तिनी एकादशी को जलझूलनी या डोल ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु शयन अवस्था से करवट बदलते हैं और देवशयनी काल का एक नया चरण शुरू होता है। इस व्रत को करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। मनुष्य को धन, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत उन लोगों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है जिनका जीवन अशांत और अस्थिर रहता है। परिवर्तिनी एकादशी के व्रत के साथ दान करना अनिवार्य माना जाता है। शास्त्रों में दान के विभिन्न फलों का वर्णन किया गया है।
परिवर्तिनी एकादशी पर किए जाने वाले दान और उनके फल:
शास्त्रों में कहा गया है "दानं पुण्यस्य कारणम्" अर्थात दान ही पुण्य का मूल है। एकादशी का व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब व्रती पारण के बाद दान करता है।
अन्नदान:
इस दिन भूखे, साधु-संतों या जरूरतमंदों को भोजन कराना सर्वोत्तम दान माना जाता है।
महाभारत और पद्म पुराण में कहा गया है कि अन्नदान करने से व्यक्ति को इस लोक और परलोक दोनों में सुख मिलता है।
इसके फलस्वरूप दरिद्रता का नाश होता है, घर में अन्न-समृद्धि आती है और कभी अकाल नहीं पड़ता।
वस्त्रदान:
एकादशी के दिन गरीब, असहाय या ब्राह्मण को वस्त्र दान करने से पापों का नाश होता है।
ऐसा माना जाता है कि वस्त्रदान करने से पितृ दोष शांत होता है और ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
यह दान व्यक्ति के जीवन में सुख, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
शास्त्रों में इसे अक्षय दान कहा गया है। यह दान अत्यंत पुण्यकारी होता है और इसे करने से लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।
स्वर्ण या चाँदी दान करने से धन, मान और यश में वृद्धि होती है।
दीपक, शय्या या पात्र दान:
विष्णु पुराण के अनुसार, दीप, धूप, पात्र या शय्या दान करने से व्यक्ति को स्वर्ग में स्थान मिलता है।
शय्या दान करने से मृत्यु के बाद आत्मा को शांति मिलती है।
इसका फल मोक्ष और पितरों की तृप्ति है।
भूमि दान:
शास्त्रों में भूमि दान को सबसे बड़ा दान कहा गया है।
इसका प्रभाव कई जन्मों तक रहता है और यह सभी पापों का नाश करता है।
यदि भूमि दान संभव न हो, तो भूमि में खेती के लिए बीज बोने का दान भी शुभ माना जाता है।
मिट्टी का घड़ा (मटका) विशेष रूप से जल और जीवन का प्रतीक है।
परिवर्तिनी एकादशी पर लाल कपड़े में लिपटे घड़े का दान करने का विशेष महत्व है।
यह दान जीवन से अशांति, मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह को दूर करता है।
शास्त्रों में इसे स्थिरता और शांति का दान कहा गया है।
लोकप्रिय मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति जल की तरह प्रवाहित होती है।
Next Story