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Papankusha Ekadashi 2025:पापांकुशा एकादशी क्यों मनाई जाती है,जानिए इस व्रत के महत्व के बारे मे

Sarita
1 Oct 2025 12:30 PM IST
Papankusha Ekadashi 2025:पापांकुशा एकादशी क्यों मनाई जाती है,जानिए इस व्रत के महत्व के बारे मे
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Papankusha Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह ब्रह्मांड के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष पापांकुशा एकादशी 3 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। इस एकादशी को पापों का नाश करने वाली एकादशी भी कहा जाता है। इस लेख में, हम आपको पापांकुशा एकादशी के महत्व के बारे में बताएंगे।
पापांकुशा एकादशी क्यों मनाई जाती है?
पापांकुशा एकादशी का अर्थ है "पापों का अंत"। इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है, मन शुद्ध होता है, सुख-समृद्धि आती है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, यह एकादशी मनोवांछित फल प्रदान करने वाली और स्वर्ग की प्राप्ति कराने वाली मानी जाती है। इस व्रत को करने से यम की यातनाओं से मुक्ति मिलती है और तीनों पीढ़ियाँ पापों से मुक्त हो जाती हैं।
पापांकुशा एकादशी का क्या महत्व है?
पापों से मुक्ति: पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और यमलोक में कष्ट नहीं भोगना पड़ता।
मन की शुद्धि: सच्चे मन से पूजा करने से मन शुद्ध होता है और बुरे कर्मों से मुक्ति मिलती है।
सुख-समृद्धि: इस व्रत को करने से भक्त को सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है।
मोक्ष की प्राप्ति: इस एकादशी का व्रत करने से अंततः स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
चंद्रमा के अशुभ प्रभावों से मुक्ति: पापांकुशा एकादशी का व्रत चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को भी दूर करता है।
पापांकुशा एकादशी पर क्या करें?
भगवान विष्णु की पूजा: पापांकुशा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है।
उपवास: पापांकुशा एकादशी का व्रत करने वाले सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं और पुण्य प्राप्त करते हैं।
दान: पापांकुशा एकादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए और दान देना चाहिए।
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