धर्म-अध्यात्म

New Janeu: श्रावण पूर्णिमा पर क्यों धारण की जाती है नवीन जनेऊ

Sarita
9 Aug 2025 10:24 AM IST
New Janeu: श्रावण पूर्णिमा पर क्यों धारण की जाती है नवीन जनेऊ
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New Janeu: जनेऊ, जिसे यज्ञोपवीत भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में पुरुषों द्वारा धारण किया जाने वाला एक पवित्र धागा माना जाता है। इसे उपनयन संस्कार के दौरान धारण किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से, यह एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है जो व्यक्ति के धार्मिक जीवन में प्रवेश का प्रतीक है। आमतौर पर जनेऊ संस्कार 8 से 16 वर्ष की आयु के बीच किया जाता है। आज 9 अगस्त को सावन पूर्णिमा है और इस दिन ब्राह्मण समुदाय के पुरुष अपना पुराना जनेऊ बदलकर नया जनेऊ धारण करते हैं। कहा जाता है कि यह परंपरा ऋषियों के काल से चली आ रही है। आइए जानते हैं इसका क्या कारण है।
सावन पूर्णिमा पर जनेऊ बदलना शुभ:
धार्मिक मान्यता के अनुसार, आमतौर पर श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन जनेऊ बदलना शुभ होता है, लेकिन इसे किसी भी शुभ दिन और शुभ मुहूर्त में भी बदला जा सकता है। अगर जनेऊ का कोई धागा टूट जाए या 6 महीने से ज़्यादा पुराना हो जाए, तो उसे बदल देना चाहिए।
रक्षाबंधन सावन पूर्णिमा को मनाया जाता है और इसलिए इस दिन को 'श्रावणी उपकर्म' भी कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से, यही वह दिन है जब प्राचीन काल में ऋषि-मुनि अपने शिष्यों को वेदों का ज्ञान देते थे और उन्हें नया जनेऊ धारण कराते थे। कहा जाता है कि यह परंपरा तब से लेकर आज तक चली आ रही है।
जनेऊ बदलने के कुछ नियम इस प्रकार हैं:-
श्रावण पूर्णिमा:- रक्षाबंधन का दिन जनेऊ बदलने के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
शुभ मुहूर्त:- आप किसी भी शुभ दिन और शुभ मुहूर्त में जनेऊ बदल सकते हैं।
टूटा हुआ जनेऊ:- यदि जनेऊ का कोई धागा टूट जाए, तो उसे बदल देना चाहिए।
6 महीने पुराना:- यदि जनेऊ 6 महीने से अधिक पुराना हो जाए, तो उसे बदल देना चाहिए।
अशुद्ध होने पर:- यदि जनेऊ किसी कारणवश अशुद्ध हो जाए, तो उसे बदल देना चाहिए।
रात्रि में न पहनें:- रात्रि में नया जनेऊ पहनना वर्जित है, सिवाय इसके कि उसे तुरंत बदलना आवश्यक हो।
पुराने जनेऊ का क्या करें?
यदि यह गलती से टूट जाए या किसी कारणवश अपवित्र हो जाए, तो स्नान के बाद गायत्री मंत्र या जनेऊ धारण करने के मंत्र का जाप करते हुए नया यज्ञोपवीत धारण करें और पुराने जनेऊ को विपरीत दिशा में उतार दें।
जनेऊ संस्कार मुहूर्त अगस्त 2025:
यदि आप सावन पूर्णिमा पर भी जनेऊ संस्कार नहीं कर पा रहे हैं, तो अगस्त माह जनेऊ संस्कार के लिए शुभ तिथियों से भरा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अगस्त 2025 में 9, 10, 11, 13, 24, 25, 27 और 28 तिथियां जनेऊ संस्कार के लिए शुभ रहेंगी।
9 अगस्त, शनिवार, शाम 04:07 बजे से शाम 06:11 बजे तक।
10 अगस्त, रविवार सुबह 6:52 से दोपहर 1:45 बजे तक, शाम 4:03 से शाम 6:07 बजे तक।
11 अगस्त, सोमवार सुबह 6:48 से 11:21 बजे तक।
13 अगस्त, बुधवार सुबह 8:57 से दोपहर 3:52 बजे तक, शाम 5:56 से शाम 7:38 बजे तक।
24 अगस्त, रविवार दोपहर 12:50 से शाम 5:12 बजे तक।
25 अगस्त, सोमवार सुबह 6:26 से सुबह 8:10 बजे तक, दोपहर 12:46 से शाम 6:51 बजे तक।
27 अगस्त, बुधवार शाम 5:00 से शाम 6:43 बजे तक।
गुरुवार, 28 अगस्त, सुबह 6:28 से दोपहर 12:34 बजे तक, दोपहर 2:53 से शाम 6:27 बजे तक।
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