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Navratri Vrat Paran: नवरात्रि व्रत पारण कब है, 1 अक्टूबर या 2 अक्टूबर, एक क्लिक में दूर करें अपनी उलझन

Sarita
29 Sept 2025 7:14 AM IST
Navratri Vrat Paran: नवरात्रि व्रत पारण कब है, 1 अक्टूबर या 2 अक्टूबर, एक क्लिक में दूर करें अपनी उलझन
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Navratri Vrat Parana: शक्ति का महापर्व शारदीय नवरात्रि, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और सम्मान के लिए मनाया जाता है। नौ दिनों का यह पर्व न केवल भक्ति और आस्था का प्रतीक है, बल्कि भक्तों के लिए शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का एक अवसर भी है। नवरात्रि अब अपने समापन की ओर है। इस दौरान लोग अपनी इच्छानुसार 1, 2, 5, 7 या 9 दिनों का व्रत रखते हैं। व्रत रखने के बाद व्रत का पारण करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। तो आइए जानें शारदीय नवरात्रि व्रत का पारण कब करें।
शारदीय नवरात्रि व्रत पारण कब है?
नौ दिवसीय नवरात्रि व्रत का पारण नवमी तिथि की समाप्ति और दशमी तिथि के प्रारंभ होने के बाद किया जाता है। यह विजयादशमी का दिन होता है। नौ दिनों का व्रत रखने वालों के लिए नवमी तिथि की समाप्ति और दशमी तिथि के प्रारंभ होने के बाद ही व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है। इसलिए वे विजयादशमी के दिन व्रत का पारण करते हैं। ऐसे में आप विजयादशमी के दिन अपने नवरात्रि व्रत का पारण कर सकते हैं। इस वर्ष विजयादशमी 2 अक्टूबर को है और इसी दिन नवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा।
नवरात्रि पारण के दौरान क्या खाना चाहिए?
नवरात्रि व्रत का पारण सात्विक, हल्का भोजन जैसे फलों का रस या साबूदाना खाकर करना चाहिए। इसके बाद देवी को अर्पित हलवा, पूरी, चना और खीर का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। नवरात्रि व्रत का पारण करने से पहले कन्या पूजन और हवन करना भी आवश्यक है, जिसके बाद ही व्रत का पुण्य फल प्राप्त होता है। लंबे उपवास के बाद अचानक भारी या मसालेदार भोजन करने से बचना चाहिए।
नवरात्रि पारण के दौरान क्या नहीं खाना चाहिए?
नवरात्रि व्रत के दौरान लहसुन, प्याज, मांसाहारी भोजन और तामसिक भोजन से हमेशा बचना चाहिए। व्रत खोलते समय सीधे नमक का सेवन करने से बचें; पहले थोड़ा मीठा खाना बेहतर है।
नवरात्रि व्रत खोलने से पहले देवी दुर्गा की पूजा करें और फिर हलवा-पूरी का प्रसाद चढ़ाकर उसे ग्रहण करें। व्रत खोलते समय हल्का और सात्विक भोजन करें और नमक का सेवन बिल्कुल न करें। नौवें दिन कन्या पूजन और हवन करें। इसके बाद ही प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें। हवन (यदि किया गया हो) और कन्या पूजन के बाद ही नवरात्रि का व्रत पूर्ण माना जाता है।
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