धर्म-अध्यात्म

Navratri 2025: नवरात्रि में कैसे करें कन्या पूजन, जानें सही विधि और उसका महत्व

Sarita
22 Sept 2025 7:46 AM IST
Navratri 2025: नवरात्रि में कैसे करें कन्या पूजन, जानें सही विधि और उसका महत्व
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Navratri 2025: नवरात्रि के नौ दिनों में शक्ति की आराधना की जाती है। इसके बाद दशहरे पर इस पर्व की समाप्ति होती है। इन पावन दिनों में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इन कंजकों के रूप में देवी दुर्गा घर में भोजन करने आती हैं। 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनकी पूजा और भोजन कराया जाता है। बहुत से लोग काम की व्यस्तता के चलते कंजक पूजन की औपचारिकता पूरी करते हैं, जिसका अधूरा फल मिलता है।
पूरे विधि-विधान से कन्याओं को भोजन कराने से मां की असीम कृपा आपके घर-परिवार पर बनी रहती है। शारदीय नवरात्रि 2025 में कन्या पूजन महा अष्टमी और महानवमी के दिन होगा। आइए जानें इसकी सही तारीख, विधि और महत्व।
नवरात्रि 2025 में कन्या पूजन कब होगा?
कन्या पूजन, जिसे कंजक भी कहा जाता है, नवरात्रि के अंतिम दिनों में किया जाता है। वर्ष 2025 में कन्या पूजन 30 सितंबर (महा अष्टमी) और 1 अक्टूबर (महानवमी) को किया जाएगा। अष्टमी पर मां महागौरी और नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद कन्या पूजन किया जाता है।
कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। नौ कन्याएं मां के नौ रूपों का प्रतीक होती हैं, जबकि एक बालक (लांगूर) भगवान भैरव का प्रतिनिधित्व करता है।
कन्या पूजन की सही विधि:
कन्याओं का चयन: 2 से 10 वर्ष की नौ कन्याओं और एक बालक (लांगूर) को आमंत्रित करें।
स्वागत और सम्मान: सबसे पहले उनके पैर धोकर स्वच्छ आसन पर बैठाएं।
पूजा: कन्याओं के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक करें, मौली बांधें और पुष्प अर्पित करें।
भोजन: कन्याओं को पारंपरिक प्रसाद जैसे पूरी, चना और हलवा परोसा जाता है। यह पारंपरिक भोग माना जाता है।
दक्षिणा और भेंट: भोजन के बाद कन्याओं को फल, वस्त्र, खिलौने या दक्षिणा दें।
विदाई: कंजकों पर पूरे दिल से प्यार लुटाए और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें और सम्मानपूर्वक विदा करें।
अगर नौ कन्याएं न मिलें तो क्या करें?
नवरात्रि में कन्याओं को हर जगह भोजन के लिए आमंत्रित किया जाता है। ऐसे में कई बार नौ बालिकाएं नहीं आ पाती हैं। अगर नौ कन्याओं को आमंत्रित करना संभव न हो, तो कम कन्याओं से भी यह पूजा की जा सकती है। शास्त्रों में बताया गया है कि शेष कन्याओं के स्थान पर गौमाता को भोजन कराना भी उतना ही शुभ फल देता है।
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