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धर्म-अध्यात्म
Narak Chaturdashi 2025: नरक चतुर्दशी आज, जान लें-पूजा विधि और कथा
Sarita
19 Oct 2025 9:53 AM IST

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Narak Chaturdashi 2025: नरक चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी या रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। आज नरक चतुर्दशी है। इस दिन अभ्यंग स्नान का बहुत महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन अभ्यंग स्नान करने वाले नरक जाने से बच जाते हैं। नरक चतुर्दशी की शाम को दीपक जलाए जाते हैं। यमराज की पूजा की जाती है और अकाल मृत्यु से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है। आइए जानें नरक चतुर्दशी की विधि और कथा।
नरक चतुर्दशी आज:
इस वर्ष कार्तिक मास की चतुर्दशी तिथि 19 अक्टूबर 2025 को दोपहर 1:51 बजे प्रारंभ होगी। यह तिथि 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 3:44 बजे समाप्त होगी।
नरक चतुर्दशी पूजा विधि:
नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और फिर घर व मंदिर की सफाई करनी चाहिए। गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। पूजा स्थल पर भगवान गणेश, देवी दुर्गा, शिव, विष्णु और सूर्य देव की मूर्तियाँ स्थापित करके उनकी पूजा करनी चाहिए। इस दिन देवी काली और हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए। बेसन के लड्डू और बूंदी का भोग लगाना चाहिए। शाम के समय घर के द्वार पर और बाहर यमराज के लिए दीपक जलाना चाहिए। यमराज से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की प्रार्थना करनी चाहिए। इस दिन कुल 14 दीपक जलाने चाहिए।
नरक चतुर्दशी कथा:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, नरकासुर नामक राक्षस ने अपनी शक्तियों से तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था। उसके अत्याचार इतने भयंकर हो गए थे कि देवता भी त्रस्त हो गए थे। नरकासुर ने देवताओं और ऋषियों की 16,000 स्त्रियों को बंदी बना लिया था। नरकासुर के अत्याचारों से त्रस्त होकर देवता और ऋषि भगवान कृष्ण के पास गए। कृष्ण ने देवी-देवताओं को आश्वासन दिया कि वह उन्हें उसके अत्याचारों से मुक्त करेंगे।
नरकासुर का वध केवल स्त्री द्वारा ही किया जा सकता था। उसे ऐसा करने का श्राप था। इसलिए, भगवान कृष्ण ने नरकासुर पर विजय पाने के लिए अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता ली। सत्यभामा की सहायता से, भगवान ने नरकासुर को परास्त किया और सभी स्त्रियों को उसकी कैद से मुक्त कराया। नरकासुर के वध के बाद, कार्तिक मास की अमावस्या को लोगों ने अपने घरों में दीप जलाए। तब से, इस दिन नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली मनाई जाती है।
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