धर्म-अध्यात्म

8 अक्टूबर को मासिक शिवरात्रि, 9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध

Ashish verma
6 Oct 2026 3:54 PM IST
8 अक्टूबर को मासिक शिवरात्रि, 9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध
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Masik Shivratri 2026 :अक्टूबर 2026 की मासिक शिवरात्रि को लेकर इस बार लोगों के बीच खास उत्सुकता है, क्योंकि शिवरात्रि और चतुर्दशी श्राद्ध एक ही चतुर्दशी तिथि से जुड़े होने के बावजूद अलग-अलग दिनों में पड़ रहे हैं। पंचांग के अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर 2026 की रात 10:15 बजे शुरू होगी और 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे समाप्त होगी। इसी वजह से मासिक शिवरात्रि 8 अक्टूबर को मनाई जाएगी, जबकि चतुर्दशी श्राद्ध 9 अक्टूबर को किया जाएगा।

दरअसल, मासिक शिवरात्रि की तारीख तय करने में निशिता काल को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि की मुख्य पूजा रात के समय, विशेष रूप से निशिता काल में की जाती है। जिस दिन की रात चतुर्दशी तिथि निशिता काल में मौजूद रहती है, उसी दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत और रात्रि पूजन किया जाता है।
इस बार चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर की रात 10:15 बजे शुरू हो रही है। इसलिए रात के निशिता काल में चतुर्दशी तिथि रहने के कारण 8 अक्टूबर, गुरुवार को मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। दिल्ली के पंचांग के अनुसार शिव पूजा का निशिता मुहूर्त रात 11:44 बजे से 12:33 बजे तक रहेगा। अलग-अलग शहरों में यह समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर रहेगा।
मासिक शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं और रात में शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। कई भक्त जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित करते हैं।
शिवरात्रि के दिन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। कुछ श्रद्धालु पूरी रात जागरण भी करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक शिवरात्रि व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
अब सवाल यह है कि जब चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर की रात शुरू हो रही है तो चतुर्दशी श्राद्ध उसी दिन क्यों नहीं होगा? इसका कारण श्राद्ध की तिथि तय करने का अलग नियम है। श्राद्ध कर्म में दिन के समय और तिथि की उपस्थिति को महत्व दिया जाता है। इस बार 9 अक्टूबर को दिन के बड़े हिस्से में चतुर्दशी तिथि रहेगी, इसलिए चतुर्दशी श्राद्ध 9 अक्टूबर, शुक्रवार को किया जाएगा। पंचांगों में भी 9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध बताया गया है।
इस तरह एक ही चतुर्दशी तिथि दो अलग धार्मिक आयोजनों की तारीख अलग-अलग तय कर रही है। शिवरात्रि के लिए रात का निशिता काल देखा जाता है, जबकि श्राद्ध कर्म के लिए दिन में चतुर्दशी तिथि की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है।
पितृ पक्ष में चतुर्दशी श्राद्ध का विशेष महत्व माना जाता है। परंपराओं के अनुसार इस तिथि पर विशेष परिस्थितियों में मृत्यु को प्राप्त पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है। इसके बाद पितृ पक्ष का अंतिम प्रमुख दिन सर्वपितृ अमावस्या आता है, जो इस साल 10 अक्टूबर 2026 को पड़ रही है। इस दिन उन पितरों का भी श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारण से संबंधित तिथि पर नहीं किया जा सका।
8 अक्टूबर की मासिक शिवरात्रि इसलिए भी खास है क्योंकि यह पितृ पक्ष के दौरान पड़ रही है। पंचांग के अनुसार 8 अक्टूबर को त्रयोदशी श्राद्ध और गुरु प्रदोष व्रत भी है, जबकि रात में चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाने के कारण उसी दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा।
शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। दिनभर सात्विक भोजन या फलाहार किया जाता है। शाम के बाद शिव मंदिर में दीपक जलाकर पूजा की जाती है। रात के निशिता काल में शिवलिंग का जलाभिषेक करना विशेष माना जाता है।
पूजा के दौरान भगवान शिव को बेलपत्र, सफेद फूल और जल अर्पित किया जा सकता है। इसके साथ ही माता पार्वती की पूजा भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाहित लोग दांपत्य सुख के लिए और अविवाहित लोग मनचाहे जीवनसाथी की कामना से भी मासिक शिवरात्रि का व्रत रखते हैं।
वहीं 9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध करने वाले लोग पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान कर सकते हैं। श्राद्ध कर्म में तिल, कुश और जल का विशेष महत्व माना जाता है। परंपराओं के अनुसार ब्राह्मण भोजन, गाय, कौवे और जरूरतमंदों को अन्न देने की भी परंपरा है।
इस बार तारीखों को लेकर भ्रम इसलिए हो सकता है क्योंकि चतुर्दशी तिथि कैलेंडर की तारीख बदलने के बीच चल रही है। लेकिन पंचांग के नियमों को समझें तो स्थिति साफ हो जाती है। मासिक शिवरात्रि 8 अक्टूबर को होगी, जबकि चतुर्दशी श्राद्ध 9 अक्टूबर को किया जाएगा।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि निशिता पूजा का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है। दिल्ली में यह 11:44 बजे से 12:33 बजे तक बताया गया है, जबकि दूसरे शहरों में इसमें कुछ मिनट का अंतर संभव है। इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम पूजा समय देखना उचित रहेगा।
कुल मिलाकर अक्टूबर की मासिक शिवरात्रि 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि रात 10:15 बजे शुरू होगी और अगले दिन रात 9:35 बजे तक रहेगी। निशिता काल में चतुर्दशी होने के कारण शिवरात्रि 8 अक्टूबर को और दिन में चतुर्दशी रहने के कारण श्राद्ध 9 अक्टूबर को होगा।
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