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धर्म-अध्यात्म
Mohini Ekadashi Vrat Katha: आज एकादशी के दिन जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, हर मनोकामना होगी पूरी
Sarita
8 May 2025 8:44 AM IST

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Mohini Ekadashi Vrat Katha: हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. मोहिनी एकादशी का व्रत आज यानी 8 मई को रखा जा रहा है. इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उनके निमित्त व्रत रखते हैं. ऐसा माना जाता है कि जो इस दिन मोहिनी एकादशी की व्रत कथा सुनते हैं, उन्हें हजार गायों को दान करने के बराबर पुण्य मिलता है. भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर को मोहिनी एकादशी व्रत के महात्म्य के बारे में बताया था. ऐसे में आइए पढ़ते हैं मोहिनी एकादशी की व्रत कथा|
मोहिनी एकादशी व्रत कथा:
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नाम की सुंदर नगरी था. वहां द्युतिमान नामक राजा राज करते थे. उसी नगर में एक वैश्य रहता था, जो धन धान्य से परिपूर्ण था. उसका नाम धनपाल था. वह हमेशा पुण्य कर्म में लगा रहता था और दूसरों के लिए कुआं, मठ, बगीचा, पोखरा और घर आदि बनवाया करता था. धनपाल भगवान श्री विष्णु का परम भक्त था और वह सदा हमेशा रहता था|
धनपाल के पांच पुत्र थे- सुमना, द्युतिमान, मेधावी, सुकृत तथा धृष्टबुद्धि. धनपाल का पांचवां पुत्र धृष्ट बुद्धि हमेशा बड़े-बड़े पापों में ही लिप्त रहता था और अपना पूरा समय जुआ खेलने में बताता था. वह किसी पर भरोसा नहीं करता था और वेश्याओं से मिलने के लिए लालायित रहता था. उसका ध्यान न तो देवताओं के पूजन में लगती थी और न ही पितरों या ब्राह्मणों के सत्कार में. वह बुरे रास्ते पर चलकर पिता का धन बर्बाद किया करता था|
एक दिन वह वेश्या के गले में बांह डाले चौराहे पर घूम रहा था. तब उसे पिता धनपाल ने देख लिया और उसे घर से निकाल दिया. साथ ही उसके दोस्तों ने भी उसका साथ छोड़ कर दिया. अब वह दिन-रात दुख में डूबा रहता और इधर-उधर भटकने लगा. वह चोरी करके अपना जीवनयापन करने लगा|
एक बार भूख-प्यास से परेशान होकर भोजन की तलाश में निकल पड़ा और कौण्डिन्य मुनि के आश्रम में जा पहुंचा. तब वैशाख माह का महीना चल रहा था और कौण्डिन्य महर्षि गंगाजी में स्नान करके आए थे. धृष्ट बुद्धि शोक से पीड़ित हो होकर मुनि कौण्डिन्य के पास गया और हाथ जोड़ सामने खड़ा होकर बोला- ‘ब्राह्मण! मुझपर दया करके कोई ऐसा व्रत बताइए, जिसके पुण्य के प्रभाव से मेरी मुक्ति हो और मेरा जीवन सफल हो जाए’|
कौण्डिन्य बोले- वैशाख के शुक्ल पक्ष में मोहिनी नाम से एकादशी का व्रत करो, इसे मोहिनी एकादशी कहते हैं. मोहिनी को उपवास करने पर प्राणियों के अनेक जन्मो के किए हुए महापाप भी नष्ट हो जाते हैं. मुनि की यह बात सुनकर धृष्ट बुद्धि प्रसन्न हो गया और उसने कौण्डिन्य के कहने अनुसार विधिपूर्वक मोहिनी एकादशी का व्रत किया. इस व्रत को करने से वह निष्पाप हो गया और अपनी देह धारण कर गरुड़ पर श्री विष्णुधाम को चला गया. इस प्रकार यह मोहिनी का व्रत बहुत उत्तम माना जाता है. इसके पढ़ने और सुनने से एक हजार गोदान का फल मिलता है|
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