धर्म-अध्यात्म

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर जरूर पढ़ें ये कथा, वरना नहीं मिलेगा व्रत का फल

Sarita
18 Jan 2026 12:37 PM IST
Mauni Amavasya 2026: आज माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है. इसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. आज प्रयागराज के माघ मेले में संगम तंट पर सबसे बड़ा स्नान किया जा रहा है. मौनी अमावस्या के दिन गंगा और संगम का जल अमृत के समान हो जाता है. इस दिन पर स्नान-दान की पंरपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. इस दिन स्नान-दान करने सभी पाप नष्ट हो जाते हैं.अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है. ये दिन पूजा-पाठ और मौन व्रत के लिए बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन साधु संत मौन साधना करते हैं. मौनी अमावस्या के दिन भगवान विष्णु और शिव की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन पूजा के समय व्रत कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए. वरना पूजा और व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता है. ऐसे में आइए पढ़ते हैं मौनी अमावस्या की कथा|
मौनी अमावस्या की कथा :
कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक ब्राह्मण अपने परिवार के साथ कांचीपूरी में निवास करता था. ब्राह्मण का नाम देवस्वामी था और उसकी पत्नी की धनवती था. दोनों को सात पुत्र थे और एक पुत्री थी. पुत्री का नाम गुणवती था. जब वो बड़ी हुई तो ब्राह्मण ने अपनी पत्नी से पुत्री के लिए वर देखने की बात कही. फिर उसने अपने छोटे पुत्र को बहन की कुंडली देकर ज्योतिष के पास भेजा. ताकि विवाह की बात आगे बढ़ सके|
ज्योतिषी ने गुणवती की कुंडली देखकर बताया कि वो विवाह के बाद विधवा हो जाएगी. ब्राह्मण और उसके परिवार को जब ये पता चला तो उन्होंने इसका उपााय पूछा. फिर ज्योतिषी ने ब्राह्मण को सिंहलद्वीप में रहने वाली एक पतिव्रता महिला सोमा धोबिन के बारे में बताया. साथ ही ज्योतिषी ने ब्राह्मण को बताया कि अगर सोमा धोबिन आपके घर आकर पूजा करे और आशीर्वाद दे तो आपकी कन्या का दोष दूर हो जाएगा|
इसके बाद ब्राह्मण ने अपनी पुत्री को अपने छोटे पुत्र के साथ
सिंहलद्वीप
भेज दिया. जब दोनों समुद्र के किनारे पहुंचे तो उनको उसे पार करने का कोई रास्ता नहीं मिला. फिर दोनों एक पेड़ के नीचे भूखे-प्यासे आराम करने लगे. पेड़ पर घोसले में एक गिद्ध का परिवार रहता था. उस समय घोसले में सिर्फ गिद्ध के बच्चे थे, जो भाई-बहन को देख रहे थे. शाम को जब गिद्ध की माता आई तो बच्चों ने भाई-बहन की सारी कहानी बताई|
दोनों भाई-बहन की कहानी सुनकर गिद्ध की माता को उन पर दया आ गई और उसने अपने बच्चों से कहा कि तुम चिंता न करो और खाना खाओ मैं भाई-बहन को समुद्र पार करवा दूंगी. इसके बाद बच्चों को खाना खिलाकर गिद्ध की माता दोनों भाई-बहन के पास पहुंची और उनसे कहा कि मैं आपकी समस्या जान गई हों. मैं आपको समुद्र पार करवाकर सोमा धोबिन के यहां पहुंचा दूंगी|
ये सुनकर दोनों भाई-बहन आनंदित हो उठे. फिर सुबह होते ही गिद्ध की माता ने दोनों को समुद्र पार करवा दिया और सिंहलद्वीप में सोमा धोबिन के घर पहुंचा दिया. फिर गुणवति सोमा धोबिन के घर के पास ही छिपकर रहने लगी और रोजाना सुबह होने पहले वो सोमा धोबिन की घर की साफ-सफाई करने लगी. एक दिन सोमा ने गुणवति को घर की साफ-सफाई और लिपाई करते हुए देख लिया|
इसके बाद सोमा गुणवती के पास गई और उससे पूछा कि वो रोज उसके घर का आंगन लीपकर क्यों चली जाती है. इस पर गुणवती से उसे सबकुछ बता दिया. फिर सोमा उसके साथ उसके घर जाने को राजी हो गई. ब्राह्मण के घर जाकर उसने पूजा-पाठ किया, लेकिन विधि का विधान कोई नहीं टाल सकता. गुणवती का विवाह होते ही उसके पति की मौत हो गई|
फिर सोमा ने अपने सारे पुण्य गुणवती को दान कर दिए, जिसके प्रभाव से उसका पति जीवित हो गया, लेकिन सोमा के पुण्य कम होते ही उसके पति और बेटे की मौत हो गई. हालांकि, सोमा ने घर से निकलने से पहले अपनी बहुओं को उसके पति और बेटे को कुछ भी होने की स्थिति में शरीर को संभालकर रखने की बात कही थी. बहुओं ने सास की बात मानी और शरीर को संभालकर रखा|
इधर सोमा धोबिन ने सिंहलद्वीप लौटते हुए रास्ते में पीपल की वृक्ष की छाया में भगवान विष्णु की पूजा की. इसके साथ ही 108 बार पीपल के वृक्ष की परिक्रमा की. इसके पुण्य प्रभाव से सोमा के घर पहुंचते ही उसके पति और बेटे फिर से जीवित हो गए|
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