धर्म-अध्यात्म

Masik Shivratri Vrat Katha: ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, पूरी होगी हर मनोकामना

Sarita
25 May 2025 8:42 AM IST
Masik Shivratri Vrat Katha: ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, पूरी होगी हर मनोकामना
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Masik Shivratri Vrat Katha: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने के लिए अत्यंत लाभदायी माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से जीवन में आ रही परेशानियां दूर हो जाती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की भी प्राप्ति होती है. मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा शाम के समय करने का विधान होता है. आज यानी 25 मई को ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है. मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने के साथ ही इसकी व्रत कथा सुनने का महत्व और भी बढ़ जाता है. ऐसे में आइए पढ़ते हैं ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि की व्रत कथा|
ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि व्रत कथा:
मासिक शिवरात्रि की पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय में चित्रभानु नामक एक शिकारी रहता था जो जानवरों का शिकार करके अपना जीवन यापन करता था. उसके ऊपर बहुत सारा कर्ज था और चित्रभानु साहूकार का कर्ज चुकाने में असमर्थ था. कर्ज न चुकाने की वजह से साहूकार ने उसे बंदी बना लिया|
जिस दिन साहुकार ने चित्रभानु को बंदी बनाया, उस दिन संयोग से शिवरात्रि थी और साहूकार के घर शिवजी की पूजा हो रही थी. चित्रभानु ने शिवज पूजा की बातें और व्रत कथा को ध्यान से सुना. अगले दिन चित्रभानु भूख-प्यास से परेशान होकर जंगल में शिकार के लिए निकल पड़ा,लेकिन उसे कोई शिकार नहीं मिला|
रात में चित्रभानु जंगल में ही एक बेल के पेड़ पर चढ़कर सोने की तैयारी करने लगा, और उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था. रात के पहले पहर में एक गर्भवती हिरणी पेड़ के पास पानी पीने आई, लेकिन चित्रभानु ने उसे छोड़ दिया. इस दौरान उसके धनुष से कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर गिर गए, जिससे अनजाने में उससे शिवजी की पूजा हो गई. रात भर उसने बेलपत्र तोड़े और शिवलिंग पर चढ़ाए, जिससे अनजाने में ही उसने शिवरात्रि का व्रत रख लिया|
हिरणी को छोड़ने के बाद चित्रभानु का हृदय बदल गया और वह शिवजी की भक्ति में लीन हो गया. अगली सुबह साहूकार ने चित्रभानु का कर्ज माफ कर दिया और चित्रभानु ने शिकारी जीवन त्यागकर वह शिव भक्त बन गया|
मासिक शिवरात्रि व्रत कथा का महत्व:
यह कथा हमें सिखाती है कि भगवान शिव की कृपा पाने के लिए दया और भक्ति का भाव का होना महत्वपूर्ण है. अगर अनजाने में भी हम सच्चे मन से शिवजी की पूजा करते हैं, तो हमें उनका आशीर्वाद जरूर मिलता है|
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