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Masik Shivratri 2025: जून में कब है मासिक शिवरात्रि, जानें तिथि और पूजा विधि

Sarita
22 Jun 2025 10:13 AM IST
Masik Shivratri 2025: जून में कब है मासिक शिवरात्रि, जानें तिथि और पूजा विधि
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Masik Shivratri 2025: मासिक शिवरात्रि का व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन देवों के देव महादेव की उपासना का विधान है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी और संकट दूर होते हैं। इसके अलावा देवी पार्वती का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार जब महाकाल क्रोधित हो गए थे, तब देवी पार्वती ने प्रभु को शांत करने के लिए शिव स्तुति की थी। यह देख शिव जी शांत और प्रसन्न हो गए थे। तभी से महादेव को प्रसन्न करने के लिए मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। यदि इस दिन सच्चे भाव से भगवान शिव को जल चढ़ाया जाए, तो जीवन की सारी परेशानियां दूर होती हैं। वर्तमान में आषाढ़ माह जारी है। इस माह में यह व्रत कब रखा जाएगा, जानते हैं।
कब है मासिक शिवरात्रि ?
इस साल आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 23 जून को रात 10 बजकर 09 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 24 जून को शाम 06 बजकर 59 मिनट पर है। तिथि के मुताबिक 24 जून को आषाढ़ माह की शिवरात्रि मनाई जाएगी।
मासिक शिवरात्रि पूजा विधि:
मासिक शिवरात्रि पर पूजा के लिए सबसे पहले एक चौकी पर शिव-पार्वती की मूर्ति या तस्वीर रखें। इसके बाद शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र अर्पित करें। इसके बाद शिव जी और माता पार्वती को फूल माला अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं। अब शुद्ध व साफ मिठाई का शिव परिवार को भोग लगाएं। अब मासिक शिवरात्रि की व्रत कथा पढ़ें। देवी पार्वती और शिव जी की आरती करें। यदि आपके वैवाहिक जीवन में समस्याएं चल रही हैं, तो देवी पार्वती को सुहाग का सामान अर्पित करें।
भगवान शिव की आरती :
जय शिव ओंकारा ऊँ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥
ऊँ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ऊँ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ऊँ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥
ऊँ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ऊँ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ऊँ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥
ऊँ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥
ऊँ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ऊँ जय शिव...॥
जय शिव ओंकारा हर ऊँ शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ऊँ जय शिव ओंकारा...॥
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता.
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता..
जय पार्वती माता...
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता.
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता.
जय पार्वती माता...
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा.
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा..
जय पार्वती माता...
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता.
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता..
जय पार्वती माता...
शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता.
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा..
जय पार्वती माता...
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता.
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता.
जय पार्वती माता...
देवन अरज करत हम चित को लाता.
गावत दे दे ताली मन में रंगराता..
जय पार्वती माता...
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता.
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता..
जय पार्वती माता...।
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