धर्म-अध्यात्म

Masik Shivratri 2025: पौष मास की शिवरात्रि आज, जानें पूजा का मुहूर्त और विधि

Sarita
18 Dec 2025 6:34 AM IST
Masik Shivratri 2025: पौष मास की शिवरात्रि आज, जानें पूजा का मुहूर्त और विधि
x
Masik Shivratri 2025: मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है और इसे भगवान शिव की विशेष आराधना के रूप में मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और रातभर शिवजी की पूजा-अर्चना करते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत विशेष फलदायक होता है और इससे जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह व्रत किसी भी महीने में किया जा सकता है और इसे करने से पापों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
शिव पुराण में भी मासिक शिवरात्रि का महत्व बताया गया है। कहा गया है कि देवी लक्ष्मी, इन्द्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती और रति ने भी इस व्रत का पालन किया था। इन महान स्त्रियों ने शिवरात्रि का पालन करके शिवजी की कृपा प्राप्त की और अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति की। यही कारण है कि इस व्रत को अत्यंत पवित्र और लाभकारी माना जाता है।
पौष मासिक शिवरात्रि 2025 की तिथि और समय:
पौष माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी इस साल 18 दिसंबर 2025 को पड़ रही है। इस दिन का व्रत सुबह 2:32 बजे शुरू होगा और अगले दिन 19 दिसंबर को सुबह 4:49 बजे समाप्त होगा। विशेष रूप से शिव पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11:51 बजे से लेकर 12:45 बजे तक है। इस समय में शिवलिंग का जलाभिषेक और पूजा करना अत्यंत फलदायक माना जाता है। व्रत के दौरान उपवास रहना और रात का जागरण करना भी शुभ फल देने वाला है।
राहु-केतु के दोष निवारण के लिए महत्व:
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु और केतु के दोष से व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की बाधाएं और परेशानियां आती हैं। मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से इन दोषों का निवारण होता है और जीवन में शांति व समृद्धि आती है। इस दिन विशेष रूप से निशिता काल में शिवलिंग का जल, दुर्वा और कुश से अभिषेक करना चाहिए। साथ ही शिव पंचाक्षरी मंत्र का कम से कम 11 माला जाप करने से राहु-केतु के दोष समाप्त होते हैं। यह उपाय उन लोगों के लिए और भी लाभकारी माना जाता है जिनकी कुंडली में राहु-केतु की महादशा चल रही हो।
असंभव को संभव बनाने वाला व्रत:
माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत कठिन और असंभव कार्यों को भी पूरा करने में मदद करता है। भगवान शिव की कृपा से यह व्रत जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक शांति लाने वाला होता है। जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ करता है, उसके हर प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
कैसे करें पूजा :
व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
स्नान के बाद साफ और सात्त्विक वस्त्र धारण करें।
इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत रखने का संकल्प लें।
संकल्प के समय मन में अपनी इच्छा या समस्या को शिवजी के चरणों में अर्पित करें।
पूरे दिन संयम व शुद्धता बनाए रखने का प्रण लें।
संकल्प के बाद घर या मंदिर में शिवलिंग का जलाभिषेक करें।
अभिषेक के लिए जल, दूध, दही, शहद या गंगाजल का प्रयोग किया जा सकता है।
इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा, भस्म और अक्षत अर्पित करें।
पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या शिव स्तोत्र का पाठ करें।
शाम के समय पुनः शिवजी की पूजा करें। दीपक जलाकर धूप दिखाएं और मंत्र जाप करें।
इस समय खीर, फल, मिठाई या सात्त्विक भोजन का भोग भगवान शिव को अर्पित करें। भोग लगाने के बाद प्रसाद को परिवार में बांटें।
Next Story