धर्म-अध्यात्म

Masan Holi: जानिए चिता की राख से ही क्यों खेली जाती है मसान होली, भगवान शिव से जुड़ी है मान्यता

Sarita
11 March 2025 7:44 AM IST
Masan Holi:   जानिए चिता की राख से ही क्यों खेली जाती है मसान होली, भगवान शिव से जुड़ी है मान्यता
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Masan Holi: जहां पूरे देश में रंग, गुलाल-अबीर और फूलों से होली खेली जाती है, वहीं काशी यानी बनारस में चिता की राख से होली खेली जाती है, जिसे मसान की होली के नाम से जाना जाता है. बनारस की मसान की होली रंगवाली होली से कुछ दिन पहले खेली जाती है. मसान होली के दिन साधु-संत और महादेव के भक्त काशी के हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट पर पूजा-अर्चना के बाद 'हर-हर महादेव' का नारा लगाते हुए चिता की राख से होली खेलते हैं. यह नजारा बड़ा ही विचित्र होता है. मसान की होली मौत का जश्न मनाने जैसी होती है. मसान की होली इस बात का प्रतीक है कि जब व्यक्ति अपने डर पर काबू पा लेता है और मौत के डर को पीछे छोड़ देता है, तो वह जीवन के आनंद को ऐसे ही मनाता है|
इस साल मसान की होली 11 मार्च 2025 को मनाई जाएगी. आपको बता दें कि काशी की मसान की होली रंगभरी एकादशी के एक दिन बाद खेली जाती है. रंगभरी एकादशी के दिन रंग, गुलाल-अबीर और फूलों से होली खेली जाती है। इस दिन काशी विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाता है। दूसरे दिन काशी में मसान वाली होली खेली जाती है, जिसमें गुलाल के साथ-साथ चिता की राख भी होती है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं काशी में होली खेलने आते हैं। तो आइए जानते हैं मसान होली से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है।
मसान होली के दिन भगवान शिव चिता की राख से होली खेलते हैं
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव विवाह के बाद पहली बार माता पार्वती को काशी लाए थे। तब महादेव और माता गौरी के काशी आने की खुशी में देवताओं ने दीप-आरती के साथ फूल, गुलाल और अबीर फेंककर उनका स्वागत किया था। लेकिन भगवान शिव भूत-प्रेत, यक्ष, गंधर्व और अखोरी आदि के साथ होली नहीं खेल सकते थे। इसके बाद भोले शंकर ने रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन भूत-पिशाचों के साथ होली खेली। कहा जाता है कि शिव के ये खास भक्त जीवन के रंगों से दूर रहते हैं, इसलिए भगवान शिव ने श्मशान में पड़ी राख से इनके साथ होली खेली थी।
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