धर्म-अध्यात्म

Margsheersh Purnima Vrat Katha: मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर ज़रूर करें ये काम, होगी हर मनोकामना पूरी

Sarita
29 Nov 2025 6:33 AM IST
Margsheersh Purnima Vrat Katha: मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर ज़रूर करें ये काम, होगी हर मनोकामना पूरी
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Margsheersh Purnima Vrat Katha: मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन कई भक्त उपवास रखते हैं और इस दिन को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस पूर्णिमा पर व्रत रखने से जीवन में आने वाले सभी कष्ट और परेशानियाँ दूर हो जाती हैं। इसे एक अत्यंत फलदायी व्रत माना जाता है, जिसमें भगवान विष्णु और चंद्र देव की विशेष पूजा की जाती है।इस वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत 04 दिसंबर को रखा जा रहा है। अन्य व्रतों की तरह, इस व्रत में भी कथा पढ़ना अत्यंत आवश्यक माना गया है। यदि आप इस पूर्णिमा को व्रत रख रहे हैं, तो यह कथा अवश्य पढ़ें, क्योंकि इससे आपके जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा:
मार्गशीर्ष पूर्णिमा की कथा के अनुसार, महर्षि अत्रि और उनकी पत्नी माता अनुसूया अत्यंत धर्मपरायण और तपस्वी थे। महर्षि अत्रि अपने तप और योगबल के कारण सभी में आदर पाते थे, और माता अनुसूया अपनी सतीत्व और पतिव्रता धर्म के लिए प्रसिद्ध थीं। एक दिन उनकी भक्ति और तप को देखकर त्रिदेव ने उनकी परीक्षा लेने का निर्णय लिया। वे भिक्षु बनकर माता अनुसूया के आश्रम में आए और उनसे भोजन की याचना की, लेकिन उनकी शर्त यह थी कि माता उन्हें निर्वस्त्र होकर भोजन दें।
माता अनुसूया ने अपनी सतीत्व और तपबल से तीनों देवताओं को छोटे बच्चों में बदल दिया और फिर भी उन्हें भोजन कराया। जब महर्षि अत्रि लौटे, तो उन्होंने देखा कि आश्रम में तीन छोटे बच्चे खेल रहे हैं। अनुसूया ने पूरी घटना उन्हें बताई। महर्षि अत्रि ने अपने योगबल से देवताओं के वास्तविक रूप को पहचान लिया। प्रसन्न होकर त्रिदेव ने उन्हें वरदान दिया और उनके यहाँ एक पुत्र के रूप में जन्म लिया, जो बाद में भगवान दत्तात्रेय के रूप में प्रसिद्ध हुए। इस कारण, मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान दत्तात्रेय, भगवान विष्णु और शिव जी की विशेष पूजा की जाती है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि :
भगवान श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए विशेष मानी जाने वाली मार्गशीर्ष या अगहन मास की पूर्णिमा इस वर्ष 04 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा तिथि उसी दिन सुबह 08:37 बजे शुरू होगी और अगले दिन तड़के 04:43 बजे समाप्त होगी। इसलिए स्नान-दान, पूजा और व्रत रखने के लिए 04 दिसंबर का दिन ही सबसे शुभ माना गया है। अगहन पूर्णिमा पर चंद्रोदय का विशेष महत्व बताया गया है। इस वर्ष चंद्रोदय शाम 04:35 बजे होगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है और इस समय पूजा-अर्चना करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।
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