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धर्म-अध्यात्म
Manorth Chaturthi Vrat 2026: 20 या 21 फरवरी, कब रखा जाएगा मनोरथ चतुर्थी का व्रत
Sarita
18 Feb 2026 12:34 PM IST

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Manorth Chaturthi Vrat 2026: हिंदू धर्म में हर महीने आने वाली चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित मानी जाती है. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विशेष रूप से मनोरथ चतुर्थी या ढुण्ढिराज चतुर्थी कहा जाता है. इस दिन व्रत और पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है. साल 2026 में इस व्रत को लेकर लोगों के मन में यह कंफ्यूजन है कि इसे 20 फरवरी को रखा जाएगा या 21 फरवरी को. आइए आसान भाषा में पूरी जानकारी जानते हैं|
कब है मनोरथ चतुर्थी, 20 या 21 फरवरी?
पंचांग के अनुसार, तिथि की गणना को लेकर अक्सर संशय की स्थिति बनती है, लेकिन व्रत हमेशा उदया तिथि और दोपहर के समय की प्रधानता के आधार पर तय किया जाता है|
चतुर्थी तिथि का आरंभ: 20 फरवरी 2026 को दोपहर 02:38 बजे.
चतुर्थी तिथि का समापन: 21 फरवरी 2026 को दोपहर 01:00 बजे.
चूंकि विनायक चतुर्थी की पूजा दोपहर के समय में की जाती है, इसलिए मनोरथ चतुर्थी का व्रत 21 फरवरी 2026, शनिवार को रखा जाएगा|
पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त:
भगवान गणेश की उपासना के लिए 21 फरवरी को मिलने वाला समय इस प्रकार है.
मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 11:42 से दोपहर 01:00 बजे तक रहेगा.
कुल अवधि : 1 घंटा 18 मिनट
मनोरथ चतुर्थी का महत्व:
शास्त्रों में इस दिन भगवान गणेश के ढुण्ढिराज स्वरूप की पूजा का विधान बताया गया है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं. मत्स्य पुराण के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत करने से व्यक्ति का हर मनोरथ सफल होता है.यह दिन बुद्धि, ज्ञान और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम माना गया है|
कैसे करें गणपति को प्रसन्न?
मान्यता के अनुसार, मनोरथ चतुर्थी पर इस विधि से पूजा करने पर शीघ्र फल मिलता है. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें. व्रत का संकल्प लें. दोपहर के शुभ मुहूर्त में गणेश जी की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें.गणपति का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें.भगवान को सिंदूर, अक्षत, दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें.गणेश जी को उनके प्रिय मोदक या लड्डू का भोग लगाएं. व्रत कथा का पाठ करें और अंत में घी के दीपक से गणेश जी की आरती उतारें. याद रखें कि विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना अशुभ माना जाता है, इसलिए रात में चंद्र दर्शन से बचें|
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