धर्म-अध्यात्म

Manikarnika Ghat:जानें मणिकर्णिका घाट की आग क्यों नहीं बुझती, इसके पीछे का अद्भुत रहस्य

Sarita
21 Jan 2026 12:24 PM IST
Manikarnika Ghat:जानें   मणिकर्णिका घाट की आग क्यों नहीं बुझती, इसके पीछे का अद्भुत रहस्य
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Manikarnika Ghat: धर्म और मोक्ष की नगरी काशी में 84 घाट हैं, लेकिन मणिकर्णिका घाट का एक खास और गहरा महत्व है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा श्मशान घाट माना जाता है। इस घाट की सबसे अनोखी और हैरान करने वाली बात यह है कि यहां की आग कभी नहीं बुझती।
अक्षय दीप (अखंड ज्योति)
मणिकर्णिका घाट से जुड़ी सबसे बड़ी धार्मिक मान्यता यह है कि यहां एक अखंड ज्योति लगातार जलती रहती है। भक्तों और स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि यह पवित्र ज्योति भगवान शिव ने खुद जलाई थी। हैरानी की बात यह है कि घाट पर होने वाले हर अंतिम संस्कार के लिए आग इसी पवित्र स्रोत से ली जाती है। चाहे दिन हो या रात, चिता को इसी अखंड ज्योति से जलाया जाता है, यही वजह है कि यह दिव्य ज्योति कभी नहीं बुझती। आइए इसके पीछे का रहस्य समझते हैं।
माता पार्वती का श्राप
मणिकर्णिका घाट नाम के पीछे एक पौराणिक कथा भी है। कहा जाता है कि माता पार्वती यहां स्नान कर रही थीं, तभी उनकी बाली (मणि) तालाब में गिर गई। बहुत खोजने के बाद भी जब बाली नहीं मिली, तो एक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने श्राप दिया कि इस घाट पर चिता की आग कभी नहीं बुझेगी। तब से लेकर आज तक शवों के आने और अंतिम संस्कार का सिलसिला कभी नहीं रुका।
यहां हर दिन कितने शवों का अंतिम संस्कार होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अलावा, अगर हम असल स्थिति देखें, तो मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लाए जाने वाले शवों की संख्या बहुत ज़्यादा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यहां रोज़ाना 30 से 35 चिताएं जलती हैं, लेकिन कभी-कभी यह संख्या बढ़ भी जाती है। इसका मतलब है कि शवों का आना 24 घंटे जारी रहता है। जैसे ही एक चिता जलने वाली होती है, दूसरी तैयार कर ली जाती है। यही मानवीय और व्यावहारिक कारण है कि इस घाट की ज़मीन कभी ठंडी नहीं होती और यहां की आग कभी नहीं बुझती। मणिकर्णिका: मोक्ष का द्वार
हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार करने से आत्मा जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाती है और सीधे मोक्ष प्राप्त करती है। यही वजह है कि देश और दुनिया के कोने-कोने से लोग अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार यहां करना चाहते हैं।
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