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धर्म-अध्यात्म
Mangalwar Vrat: मंगलवार का रखा है व्रत तो इस विधि से करें भगवान हनुमान की पूजा
Sarita
28 Oct 2025 9:28 AM IST

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Mangalwar Vrat: सप्ताह के सभी दिन अपने विशेष महत्व के लिए जाते हैं। इन्हीं में से एक मंगलवार है, जो हनुमान भक्तों के लिए बेहद खास होता है। मान्यता है कि इस दिन प्रभु की पूजा-अर्चना करने से साधक को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है, इसके अलावा उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। कहते हैं कि मंगलवार के दिन यदि सच्चे भाव से व्रत किया जाए, तो कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती हैं। मंगल के प्रभाव से व्यक्ति ऊर्जावान और साहसी बनता है। हालांकि व्रत के शुभ प्रभाव से बजरंगबली की कृपा भी प्राप्त होती हैं। लेकिन इस दौरान पूजा हमेशा संपूर्ण विधि से करें। इससे संकटों से मुक्ति प्राप्त होने का आशीर्वाद मिलता है। आइए इस दिन की संपूर्ण पूजा विधि को जानते हैं।
पूजा विधि :
मंगलवार के दिन सुबह ही स्नान कर लें।
अब साफ लाल रंग के वस्त्रों को धारण करें।
इसके बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
इस दौरान ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।
अब हनुमान जी के मंदिर या एक चौकी पर प्रभु की तस्वीर को स्थापित कर लें।
सबसे पहले भगवान हनुमान जी को फूल, धूप, फल, सिंदूर अर्पित करें।
इसके बाद शुद्ध देसी घी से दीप जलाएं।
अब बजरंगबली के मंत्रों का जप करें।
हनुमान चालीसा पढ़ें।
अंत में आरती करें।
हनुमान जी की आरती :
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुधि लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
पैठी पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे।
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संत जन तारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
भय नाश करने के लिए हनुमान मंत्र :
हं हनुमंते नम:।
स्वास्थ्य के लिए:
नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा
संकट दूर करने का मंत्र:
ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।
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