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धर्म-अध्यात्म
Mangalwar Upay: हनुमान जी की विशेष कृपा पाने के लिए मंगलवार को करें ये काम, जानें आसान उपाय
Sarita
9 Jun 2025 12:31 PM IST

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Mangalwar Upay: हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबक हर दिन किसी ना किसी देवी या देवता से जुड़ा है. सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार का भी खास महत्व है. दरअसल यह दिन भगवान हनुमान जी से जुड़ा हुआ माना जाता है. भक्त इस दिन पूरे विधि-विधान से हनुमान जी की उपासना करते हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार कलियुग में हनुमान जी की उपासना अत्यंत मंगलकारी मानी गई है. यही वजह है कि लोग सप्ताह में एक दिन मंगलवार का व्रत भी रखते हैं. मान्यता है कि भक्ति पूर्वक हनुमान जी की आराधना करने के उनकी कृपा प्राप्त होती है. जिसके जीवन से समस्त दुख, कष्ट और परेशानियां खत्म हो जाती हैं. आइए जानते हैं मंगलवार को किए जाने वाले कुछ खास उपायों के बारे में|
मंगलवार के उपाय:
- मंगलवार को भगवान हनुमान जी को तुलसी की माला पहनाना बेहद शुभ और लाभकारी माना गया है. मान्यता है कि ऐसा करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है|
- शास्त्रों के मुताबिक मंगलवार को हनुमान जी को बूंदी का भोग लगाने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं.
- मंगलवार को हनुमान जी महाराज को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाने से परिवार में खुशहाली आती है|
- मंगलवार को गाय और बंदरों को गुड़ चना खिलाने से जीवन में शांति बनी रहती है मुक्त रहते हैं.
- वाहन दुर्घटना से बचाव के लिए भगवान हनुमान जी महाराज के समक्ष लाल बाती और घी का दिया दिखाना चाहिए.
- हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर लेप लगाएं। हर मंगलवार के दिन ऐसा करने से मंगल दोष के साथ शनि दोष से भी मुक्ति मिल जाएगी|
- भगवान हनुमान जी को 108 तुलसी के पत्तों पर राम नाम लिखकर पहनाएं. ऐसा करने से भगवान हनुमान जल्द प्रसन्न होते हैं. इसके साथ ही मंगल दोष और शनि दोष से भी मुक्ति मिलती है|
- मंगलवार के दिन बंदरों या लाल रंग की गायों को भुने चने और गुड़ खिलाएं। ऐसा करने से मंगल की स्थिति सही हो जाएगी|
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की..
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की..
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की..
पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की..
सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥
आरती कीजै हनुमान लला की..
जो हनुमानजी की आरती गावे। बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जय श्रीराम, जय हनुमान, जय हनुमान..
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