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Mangalwar Ke Upay: हनुमानजी की कृपा पाने के लिए मंगलवार को करें ये एक काम

Sarita
31 March 2025 12:20 PM IST
Mangalwar Ke Upay: हनुमानजी की कृपा पाने के लिए मंगलवार को करें ये एक काम
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Mangalwar Ke Upay: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगलवार के दिन पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत होती है, जिससे व्यक्ति को करियर में सफलता मिलती है, इतना ही नहीं मंगल की शुभ स्थिति के कारण व्यक्ति आत्मविश्वासी भी बनता है। मान्यता है कि मंगलवार के दिन वीर बजरंगी को बूंदी का भोग लगाने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्त पर अपनी कृपा बरसाते हैं। मंगलवार के दिन विधि अनुसार हनुमान जी की पूजा करने से व्यक्ति को कई लाभ मिल सकते हैं। इस दौरान पूजा में हनुमान जी के इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप करना और भी लाभकारी साबित हो सकता है, इससे व्यक्ति की शक्ति, शांति, बुद्धि और ज्ञान में भी वृद्धि हो सकती है। आइए जानते हैं इन मंत्रों के बारे में।
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट
माना जाता है कि मंगलवार के दिन इस शक्तिशाली मंत्र का जाप करने से शत्रुओं पर विजय और मन से सभी तरह के भय समाप्त होते हैं।
ॐ नमो भगवते हनुमते नमः
मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। ऐसे में आप हनुमान जी की पूजा में इसका पाज जरूर करें। इससे वह प्रसन्न भी हो सकते हैं।
मनोकामना के लिए मंत्र
ॐ महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते. हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये। नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।
स्वास्थ्य के लिए मंत्र
नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा
संकट दूर करने का मंत्र
ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
कर्ज मुक्ति के मंत्र
ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।
प्रेत भुत बाधा के लिए मंत्र
हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल: अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।
हनुमान जी की कृपा पाने के लिए आप उनकी आरती भी अवश्य करें।
हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।
पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।
बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
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