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Mahashivratri 2026: मेष से लेकर मीन राशि वाले इस तरह करें शिवलिंग का अभिषेक, ग्रह दोष से मिलेगी मुक्ति

Sarita
12 Feb 2026 8:36 AM IST
Mahashivratri 2026:  मेष से लेकर मीन राशि वाले इस तरह करें शिवलिंग का अभिषेक, ग्रह दोष से मिलेगी मुक्ति
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Mahashivratri 2026: इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए मात्र एक लोटा जल भी पर्याप्त होता है, क्योंकि वे सहज ही भक्तों की भक्ति से प्रसन्न हो जाते हैं। हालांकि, शिवपुराण में उल्लेख मिलता है कि यदि महाशिवरात्रि के दिन राशि के अनुसार जलाभिषेक किया जाए तो विशेष फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इससे दुख, दरिद्रता, क्लेश और ग्रह दोषों में कमी आती है तथा मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। आइए जानते हैं राशि के अनुसार जलाभिषेक की विधि|
राशि अनुसार महाशिवरात्रि जलाभिषेक:
मेष राशि-
जल में गुड़ मिलाकर या शहद से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके साथ 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
वृषभ राशि- गाय के दूध और दही से भगवान शिव का अभिषेक करना शुभ माना गया है। “सांब सदाशिव” मंत्र का जप लाभकारी रहेगा।
मिथुन राशि- गन्ने के रस से अभिषेक करें। इससे कुंडली के ग्रह दोषों में कमी आने और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ने की मान्यता है।
कर्क राशि- जल में 108 अक्षत (साबुत चावल) डालकर “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें।
सिंह राशि- शहद से अभिषेक करें और भगवान शिव को लाल चंदन का तिलक लगाएं। रुद्राष्टक का पाठ करना शुभ रहेगा।
कन्या राशि- भांग मिश्रित जल से अभिषेक करें और शिव चालीसा का पाठ करें। इसे रक्षा और कल्याणकारी माना गया है।
तुला राशि- घी से अभिषेक करें। यह उपाय संतान सुख, धन लाभ और अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभ माना जाता है।
वृश्चिक राशि- गंगाजल में गुलाब जल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। इससे दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
धनु राशि- जल अर्पित करने के बाद पीली सरसों चढ़ाएं। मान्यता है कि इससे सौभाग्य में वृद्धि होती है।
मकर राशि- जल में काले तिल डालकर अभिषेक करें और बिल्व पत्र अर्पित करें। इससे शनि संबंधी शुभ फल मिल सकते हैं।
कुंभ राशि- सरसों के तेल या पंचामृत से अभिषेक करना लाभकारी माना गया है। यह उपाय भय, रोग और शत्रु बाधा से राहत दिलाने वाला बताया गया है।
मीन राशि- घी और गंगाजल से अभिषेक करें। साथ ही 108 अक्षत “ॐ नमः शिवाय” कहते हुए अर्पित करें और महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
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